अस्वथामा कौरवों का अंतिम सेनापति बनाया गया था !जब दुर्योधन भीम के द्वारा गदा युद्ध में पराजित होगया !और घायल अवस्था में पड़ा हुआ था !तब महाभारत युद्ध में कुल दस लोग जीवित बचे थे !पांच पांडव श्री कृष्णा और सात्यकि तथा कौरव पक्छ के तीन महारथी अश्वत्थामा ,कृपाचार्य और कृतवर्मा ! औरउस समय तक पांचाल महारथी धृस्टद्युमन आदि और द्रौपदी के पांचो पुत्र भी जीवित थे ! जब ये तीनो महारथी घायल पड़े हुए दुर्योधन के पास पहुंचे तो अश्वत्थामा ने दुःख व्यक्त करते हुए कहा की भीम ने तुमको छल पूर्वक मारा है !और तुम्हारे सर के ऊपर लात प्रहार कर तुम्हारा अपमान किया है !इस पर नाग की तरह फुफकार कर दुर्योधन उठकर अधलेटा हो गया !और उसने कृपाचार्य से कहा की जल लाव में अश्वत्थामा का अभिषेक कर इसे सेनापति बनाता हूँ !यह मेरे अपमान का बदला पांडवों से लेगा !इसके बाद तीनो महारथी बन में चलेगये और बरगद के ब्रक्छ के नीचे लेट गए ! !कृतवर्मा और कृपाचार्य तो सो गए ! किन्तु अश्त्थामा अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए सोच विचार में मग्न था !उसे नींद नहीं आरहीथी !उसी समय एक उल्लू ने सोये हुए पक्छियों पर हमला करके उनके प्राण ले लिए !अश्वत्थामा ने भी तुरत यह नित्नय किया की वह भी समस्त पांचालों का नींद में हीबध कर देगा !इस प्रकार जब धृष्टद्युम्न और शिखंडी तथा द्रौपदी के पांचो पुत्र और सभी पांचाल महारथी गहरी निद्रा में सो रहे थे !तभी अश्वत्थामा ने सभी को मार डाला था !जब द्रौपदी के अपने पुत्रों केबध का समाचार सुना !तो उसने भीम सेन से अश्वत्थामा को मारनेके लिए कहा !भीमसेन तुरत गदा लेकर जिस तरफ अश्वत्थामा गया था !उसको मारने के लिए उसके पीछे भागे !भगवान श्री कृष्णा ने सभी पांडवों से कहा की हम सबको भीम की रक्छा के लिए उसके पीछे चलना चाहिए !क्यूोंकि अश्वत्थामा के पास ब्रमासास्त्र है ! और वह भीम पर चला देगा !गंगा द्वार में भीम ने अश्वत्थामा को पकड़ लिया और जैसे ही उस पर प्रहार करने के लिए गदा उठायी उसने ब्रह्मास्त्र चला दिया !भगवान श्री कृष्णा ने कहा की सबलोग अपने अश्त्र जमीन पर दाल दो !तो यह ब्रह्मास्त्र आक्रमण नहीं करेगा !पांडवों ने सभी अश्त्र जमीन पर दाल दिए !फिर श्री कृष्णा ने अर्जुन से कहा की अब तुम इसब्राह्माश्त्र को शांत करो !अर्जुन ने इस संकल्प के साथ ब्रह्मास्त्र का अनुसन्धान किया की मेरे ब्रह्मास्त्र से गुरु पुत्र का बध ना हो !और यह अश्वत्थामा द्वारा चलाये गए ब्रह्मास्त्र को शांत कर दे !बादमें अर्जुन ने अपना ब्रह्मास्त्र बापिस ले लिया !किन्तु अश्वत्थामा अपना ब्रह्माश्त्र बापिस नहीं कर सका !उसने श्रीकृष्ण से कहा किउसकेपिता ने उसको ब्रह्माश्त्र सिर्फ एक बार चलने का ही ज्ञान दिया था !किन्तु बापिस करने का ज्ञान नहीं दिया था !द्रोणाचार्य ने अश्वत्थामा को ब्रह्मास्त्र देने से मना कर दिया था !क्युओंकी अस्वत्थामा चंचल बुद्धि और क्रोधीस्वभाव का था !इसीलिए उनको संदेह था की यह ब्रह्माश्त्र मनुष्यों पर चला देगा ! और ब्रह्माश्त्र की मर्यादा का पालन नहीं करेगा !बहुत दबाब के बाद द्रोणाचार्य ने सिर्फ एक बार उसको ब्रह्मास्त्र चलाने का ज्ञान दिया था !क्योँकि उसने सभी पांडवों के विनाश कासंकल्प कर ब्रह्माश्त्र चलाया था !इसीलिए वह ब्रमाशास्त्र अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ पर गिरा !परिणाम स्वरुप पांडवों काउत्तराधिकारी परिच्छित मरा हुआ उत्पन्न हुआ था !जिसे कृष्णा ने अपने योग बल से जीवित कर दिया था !पांडवों द्वारा पकडे जाने के बाद उसकी मणि जो जन्मजात उसके मष्तिष्क में स्थापित थी उसको निकाल लिया गया था !और भगवान कृष्णा ने उसे श्रापदिया था की वह ३००० बर्ष तक पृथ्वी पर घायल अवस्था में घूमता रहेगा !पुराणो मेउसको चिरजीवी कहा गया है !इसीलिए उसके सम्बन्ध में यह प्रचिलित है !की वह भगवान शंकर की उपासना करने नित्य प्रति आता है !अश्वत्थामा का यह कथानक गीताप्रेस की महाभारता ग्रन्थ में है !
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