Saturday, 8 August 2015

वैदिक धर्मग्रंथों में एक युग को सत्ययुग ,त्रेता ,द्वापर और कलियुग में विभाजित किया गया है !और धर्म के चार चरण बताये गए हैं !सतयुग में धर्म के चारों चरण विद्यमान रहते हैं !त्रेता में तीन ,द्वापर में दो और कलियुग में धर्म कसिर्फ एक चरण रह जाता है !कलियुग की आयु चार लाख बत्तीस हजार साल की धर्मग्रंथों में बतायी  गयी है !इस युग में सभी धर्मों में अधर्म प्रवेश कर जाता है !विश्व का ऐसा कोई धर्म नहीं हैं !जिनमे अधर्म की प्रधानता न हो !यह बात वैदिक धर्मग्रंथों में बहुत स्पष्ट रूप से कही गयी है !इसिलए ये बाबा बेशः धारी बाबा भी साधारण गृहस्थोँ से भीअधिक भोग विलास युक्त जीवन जीते हैं !किन्तु अपने इन कुकृत्यों के कारण पकडे भी जाते हैं !और राजदंड के साथ लोक मेअपयश के भी भागी होते हैं !इसीलिए श्रद्धालुओं को विशेष रूप से महिलाओं को इन बाबाओं से दूरी बनाकर रहना चाहिए !सभी धार्मिक श्रद्धालुओं को इस युग में मनुष्यों को गुरु बनाने के बजाय भगवान को ही गुरु बनाना चाहिए !और उनके द्वारा दिए हुए उपदेश को ही उनका आदेश समझ कर उसको जीवन में उतारने की चेस्टा करना चाहिए !जो बाबा अपने को भगवान घोषित करता हो !उसका त्याग तो विषैले सर्प  की तरह कर देना चाहिए !क्योँकि सारे अधर्मियोँ ,पाखंडियों में उस से बड़ा अधर्मी और पाखंडी कोई नहीं हो सकता है ! जो धार्मिक जिज्ञासु और श्रद्धालु शुद्ध सनातन वैदिक धर्म संस्कृति के ग्रंथों का यथार्थ स्वरुप में अध्ययन और स्वाध्याय  करना चाहते हैं !उन्हें गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित धर्मग्रंथो का अध्ययन  और स्वाध्याय करना चाहिए !गीता प्रेस ने सनातन धर्मके गीता ,उपनिषद ,रामायण आदि सद्ग्रन्थों का यथाबत रूप में प्रकाशित किया है !और लागत से काम कीमत पर गीता आदि ग्रंथो को श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराया है !कल्याण मासिक पत्रिका और उसके विशेषांकों के द्वारा श्रद्धालु सनातन  धर्म का सही दर्शन और स्वामी रामसुख दास ऐसे महान संतो का मार्ग दर्शन भी प्राप्त कर सकते हैं !आज जो आश्रम और बाबा लोग धर्म के मूल तत्त्व ,त्याग ,तपस्या ,संयम आदि के स्थान पर भोग का शिक्छण देरहे हैं !और अधर्म के साक्छात स्वरुप बन गए हैं ! उनसे मुक्ति का एक ही उपाय है !की भगवान को अपना गुरु मानो और उनके उपदेश को गुरु मन्त्र मानकर उसको जीवन में धारण करो !और शुद्ध रूप में सनातन धर्म के ग्रंथों के लिए गीता प्रेस से प्रकाशित धर्म गर्न्थो का श्रद्धा सहित स्वाध्याय करो !ये उड़ीसा के बाबा जी जो  स्त्री प्रसंग और जींस पहन कर और दारू पीकर और मुर्गा खाकर संत के पवित्र बेश को अपवित्र करने के  आरोप में गिरफ्तार किये गए है !कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं  !ओर अब इनको भी अन्य फर्जी संतो की तरह जेल के सींखचों में बंद रहना पड़ेगा !इनके उदाहरण से अन्य बाबाओं को यदि बे योग युक्त जीवन नहीं जी सकते हैं ! तो उन्हें गेरुवा वस्त्र त्याग देना चाहिए  !और विवाह कर गृहस्थ जीवन जीना चाहिए !यदि बे वास्तव में संत हैं तोउनको संत के लिए स्वीकृत शास्त्रीय मर्यादा से युक्त जीवन जीना चाहिए !

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