Friday, 21 August 2015

सभी सरकारों का बाजार पर नियंत्रण समाप्त हो गया है !और व्यपारियों ने नैतिकता खो दी है !कीमतों में उछाल का फायदा उत्पादक को प्राप्त नहीं होता है !जब कीमते कम हो जाती है तो नुक्सान सिर्फ उत्पादक को ही होता है !यह बड़ी विचित्र स्थिति भारत के किसानो की है !भाव चढ़े तो फायदा व्योपारी का होता है और घटे तो नुक्सान उत्पादक का होता है !इस बिगड़ी हुई स्थिति का  सुधार कानून से नहीं हो सकता है !इसका सुधार तो सिर्फ नैतिकता के विकास से ही हो सकता है !जमाखोरी छोटे दुकानदार तो लगभग नहीं के बराबर करते हैं !जमाखोरी तो वही व्योपारी करते हैं जो या तो राजनेता होते हैं !या जिनको राजनेताओं का संरक्छण प्राप्त होता है !और इस प्रकार के व्योपारियों पर सरकारी अधिकारी भी छपा डालने का साहस नहीं करते हैं !और रिश्वत लेकर उनको खुली छूट दे देते हैं !अगर प्याज का आयात होगा तो उसमे भी बड़ी मात्रा में कमीसन खोरी होती है !और जबतक आयातित प्याज बाजार में आता है !तब तक व्योपारी बेशुमार फायदा उठा लेते हैं !जमाखोर व्योपारी और संरक्छण देने वाले राजनेता और रिश्वत खोर अधिकारी की  तिकड़ी कायम रहेगी तब तक आम जनता को राहत प्राप्त नहीं होगी

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