Monday, 24 August 2015

नेपाल का राजतन्त्र भले ही जनभावनाओं के अनुकूल न रहा हो !किन्तु लोकतंत्र का जिस तरह का विकृत स्वरुप घोर स्वार्थ निष्ठ नेता प्रस्तुत कर रहे हैं !उसका परिणाम यह मधेशीयों का खूनी आंदोलन है !ये जनप्रितिनिधि कितने स्वार्थ निष्ठ हैं कि अब तक सर्वसम्मत संविधान भी नेपाल के लोकतंत्र को नहीं दे पाये हैं !राजतंत्र में तो जनता एक ही राजा के अत्याचार और अनीति से पीड़ित होती है !किन्तु लोकतंत्र में तो जनता के द्वारा चुन कर आये ये तथाकथित नेताओं के घोर स्वार्थ के कारण जनता को कष्ट उठाने पड़ते हैं !अब विश्व में सभी लोकतांत्रिक सरकारों  में इन भ्रष्ट नेताओं के बिरुद्ध बगावत के स्वर फूटने लगे हैं !मुश्किल से अनेक बलिदानो के प्राप्त लोकतान्त्रिक व्यबश्था का इन स्वार्थ निष्ठ नेताओं ने सर्व नाश कर दिया है  ! और अब लोग लोकतंत्र का विकल्प तलाशने लगे हैं !नेपाल के मधेशी जिनका नेपाल की अर्थ व्यबस्था में महत्त्व पूर्ण योग दान है !उनको उनके संवेधानिक अधिकारों से उनको बंचित करने का प्रयत्न नेपाल के लोकतंत्र की जड़ें हिला देगा !मधेशियोँ को उनके वैधानिक अधिकार नए संविधान में सुरक्छित और संरक्छित किये जाने चाहिए

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