यह तुलना कि औरंगजेब अधिक धर्म निर्पेक्छ था या अकबर? ये तुलना ही मूल रूप से इस्लामिक दृष्टिकोण से गलत हैं !इस्लाम सिर्फ पवित्र पुस्तक कोरान पर आधारित है !जिसे मुसलमान अल्लाह की किताब मानते हैं !और उसमे कौमा या पूर्णविराम को भी हटाया नहीं जा सकता है !इसीलिए कोई भी मुसलमान धर्म निर्पेक्छ मुसलिम रहते हुए नहीं हो सकता है !अकबर ने जो दीनेइलाही धर्म चलाया था !वह शाशक के रूप में बहुसंख्यक हिन्दू प्रजा की विविध उपासनाओं को दृष्टिगत रख कर चलाया गया था !किन्तु उसके इस धर्म को दरबारी मुसलमान भी स्वीकार नहीं करते थे !और वह धर्म अकबर की शाशन काल में भी मुल्ला मौल्वियोँ ने स्वीकार नहीं किया था !और यह दीने इलाही के शब्द में ही अल्लाह का धर्म का ही उद्घोष था !उसका नामकरण ही इस्लाम की उदारता प्रगट और व्यापक करने के लिए किया गया था !किन्तु इसको भी मुसलमानो ने स्वीकार नहीं किया था !अकबर एक अत्यंत अय्यास और भोग विलास में अनुरक्त रहने वाला शाषक था !उसके राज्य में प्रजा ना तो सुखी थी और ना ही इस्लामिक कट्टर पंथियोँ की कटटरता से मुक्त थी !अकबर के समकालीन संत तुलसीदास ने उसके शाशन काल में प्रजा के दुखोँ का वर्णन कविताबली में किया है !अकबर को महान कहना इतिहास का सबसे बड़ा झूठ है !अकबर के साथ कुछ गद्दार जैसिंघ मानसिंघ आदि राजपूत जुड़ गए थे !महान तो महाराणा प्रताप थे !जो वीरता और शौर्य की मिशाल थे !जिन्होंने राज्य से बंचित होना स्वीकार किया घास की रोटियां खायीं अकबर के सभी लालचोँ को ठुकराया लेकिन उसकी अधीनता स्वीकार नहीं की !महाराणा प्रताप की बीरता को देख कर अकबर की आँखोँ में भी आंसू आगये थे !अगर राजस्थान के गद्दार राजपूत राजाओं ने राणा प्रताप का साथ दिया होता t तो हिंदुस्तान में विदेशी मुगलिया सल्तनत का अंत हो गया होता !इसीलिए जिसने भारतमाता की बलिवेदी पर अपने राज्य सुख भोग को कुर्बान किया बासतव में वह महाराणा प्रताप महान था !औरंगजेब की कटटरता और हिन्दुओं पर जोर जुल्म और हिन्दू मंदिरों के विध्वंश का काला इतिहास इतना भयानक और बीभत्स है ! कि उसकी कल्पना करके रूह काँप जाती है !सिखोँ के गुरु तेगबहादुर को जिस निर्दयता से खोलते तेल में खुलाया गया !और कई दिनों तक उनकी लहाश चांदनी चौक में पड़ी रही !उस से अधिक क्रूरता की मिसालें इतिहास में मुश्किल से मिलेंगी !वह कट्टर सुन्नी मुसलमान था !और और उसने सिया मुसलमानो पर भी कहर बरपा किया था !समर्थ रामदास जो शिवाजी के गुरु थे दास बोध में उस समय हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों का सजीव चित्रण किया है !और उन्होंने ही औरंगजेब की क्रूरता के विरुद्ध शिवाजी को दिव्य शक्ति प्रदान की थी !इसीलिए अकबर और औरंगजेब की प्रसनसा करना उनको महान बताना और महाराणा प्रताप और शिवाजी की मात्र भूमि के लिए किये गए बलिदान को कम करके आंकना ठीक नहीं है !शिवजी की मृत्यु पर मुसलिम इतिहासकारों ने लिखा था की काफ़िर दोजख में चलागया !
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