Tuesday, 11 August 2015

युधिस्ठर का यह शाप सही सन्दर्भों मेसमझा जाना चाहिए !पांडव जब महाभारत में वीर गति  प्राप्त करने वाले महारथियों आदि को जलांजलि अर्पित कर रहे थे !तब उनकी माता कुंतीने युधिस्ठर  से करण   को भी जलांजलि देनेकोकहा  !और इस रहस्य का उद्घाटन किया कि उसका जन्म मेरे ही गर्भ से जब में अविवाहित थी तब हुआ था !और करण मेरा सहोड़ पुत्र है (सहोड़ पुत्र विवाह के पूर्व होने वाले पुत्र को कहा जाता है !और विवाह के बाद  जिस व्यक्ति  से कन्या का विवाह होता है ! वह !उसी का पुत्र माना जाता है ) जब युधिस्ठर को जानकारी माँ ने दी  !तब युधिस्ठर मोह ग्रस्त हो गए और क्रोध के आवेश  में उन्होंने यह श्राप दे दिया !जो श्राप मोहग्रस्त व्यक्ति द्वारा आवेश में दिया जाता है !उस श्राप का तदनुसार फल नहीं होता है !युधिस्ठर सत्यवादी थे ! और धर्मनिष्ठ थे !किन्तु आवेशऔर मोह के कारण श्राप देते समय बे सत्य और धर्म का त्याग कर श्राप देने की समयावधि में में इन निष्ठाओं से हट गए थे !युधिस्ठर के मोहग्रस्त और आवेश युक्त होने का एकओरउदाहरण महाभारत में करण को लेकर है !करण पांडवों का प्रमुख शत्रु था !करण ने अपनी माँ कुंती की प्रार्थना पर माँ को यह बचन दिया था की वह युद्ध में अर्जुन के अलावा और किसी पांडवा का बध नहीं करेगा !एक बार युधिस्ठर और करण का युद्ध हुआ जिसमे युधिस्ठर बुरी तरह युद्ध में करण के वाणो के प्रहार से घायल हो गया और मूर्छित होगया !उनका सारथि उनको मूर्छित अवस्था में लेकर उनके केम्प में ले गया !अर्जुन को जब युधिस्ठर के घायल होने का समाचार मिला तो वह युद्ध भूमि छोड़ कर युधिस्ठर को देखने के लिए तम्बू में गया !तब तक युधिस्ठर होश में आगये थे !युधिस्ठर यह समझे की अर्जुन करण को मार कर आये हैं !जब अर्जुन ने बताया की करण अभी जिन्दा है !तो युधिस्ठर एक दम आवेश में आगये और उन्होंने अर्जुन की औरउनके गांडीव धनुष की कटु निंदा कर दी !अर्जुन की यह गुप्त प्रतिज्ञा थी !की जो उनके गांडीव धनुष की निंदा करेगा बे उसका शीश काट लेंगे !अर्जुन ने म्यान से अपनी तलबार युधिस्ठर की  गर्दन काटने के लिए निकाल ली थी !बड़ी मुश्किल से श्री कृष्णा ने अर्जुन को समझा कर तलबार म्यान के अंदर करायी !इस घटना से यह सिद्ध होता है !कि जैसे क्रोध में की हुई गांडीव और अर्जुनकी निंदा  और श्राप का कोई भी असर अर्जुन और गांडीव पर नहींपड़ा !उनकी निंदा से ने गांडीव की शक्ति नष्ट हुई थी ! ओरना ही अर्जुन की शक्ति पर विपरीत असर पड़ा था !उसी प्रकार से युधिस्ठर के इस श्राप का भी महिलाओं पर कोई असर  नहीं पड़ा !जितने गुप्त रहस्य महिलाएं अपने अंदर लेकर जीती हैं !उनके मुकाबले रहस्य छुपाने में तो कोई भी पुरुष मुकाबला नहीं कर सकता है !स्त्री चरित्रं पुरुषश्य भाग्यम देवो ना जानाति कुतो मनुष्यः !

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