Saturday, 1 August 2015

कर्ण से भी अधिक बलशाली और अजेय भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य ,अश्वत्थामा, भगदत्त आदि अनेक योद्धा कौरवों की तरफ से लड़ रहे थे !कौरवो की सेना ११अक्छोहनि थी ! जबकि पांडवों की सेना सिर्फ ७अक्छोहनि थी! कर्ण अर्जुन से कई बार पराजित हुआ था !जब विराट के यहां पांडव अज्ञात बास में थे !तब भीष्म द्रोणा कर्ण कृपाचार्य अश्वथामा दुर्योधन सहित सभी योद्धाओं को अर्जुन ने अकेले ही पराजित कर दिया था  !चित्ररथ गन्धर्व से युद्ध करते समय कर्ण जान बचाकर भाग गया था !और उसने दुर्योधन को बंदी बना लिया था !तब दुर्योधन ने विलाप करते हुए पांडवों से रक्षा की मांग की थी !तब अकेले अर्जुन ने ही चित्ररथ गन्धर्व को पराजित कर दुर्योधन को बंधन मुक्त कराया था !अर्जुन के पास पाशुपत शाश्त्र के अतिरिक्त ब्रह्म्मास्त्र  सहित अनेको दिव्यास्त्र थे !महाभारत युद्ध के पूर्व भीष्म और द्रोणाचार्य ने भी दुर्योधन से स्पष्ट कह दिया था ! कि अर्जुन अजेय है उसको हम भी पराजित नहीं कर सकते हैं !संपूर्ण महाभारत युद्ध में एक बार भी अर्जुन की पराजय नहीं हुई ! और नाही वह युद्ध के मैदान से कभी भागा !जबकि कर्ण की अनेक बार पराजय हुई  !और उसे युद्ध से भी भागना पड़ा  था! कर्ण के पास भी दिव्य  कवच कुण्डल थे !परशराम जी ने भी उसे अश्त्र शस्त्र की शिक्छा दी थी ! तथा अपना विजय धनुष भी प्रदान कियाथा !कर्ण अद्भुद बीर था उसमे अनेक गुण थे !किन्तु उसमेसबसे बड़ा अबगुण यह था कि वह अधर्म का साथ दे रहा था !और पांडव भी अत्यंत शक्ति शाली थे !किन्तु उनका सबसे बड़ा गुण यह था कि
 बे धर्म के मार्ग पर थे !और उनकी सबसे बड़ी शक्ति भगवान श्री कृष्ण थे !यह बात दुर्योधन को भीष्म पितामह  ने द्रोणाचार्य ने भगवान परशुराम ने गांधारी आदि ने अनेक बार बतायी  थी किन्तु काल के बस हुए कौरवों ने इन सलाहोंको नजर अंदाज कर दिया था !कर्ण की मौत पर दुर्योधन ने कहा था कि जिस कि  शक्ति के बल पर  मेने  भगवान श्रीकृष्ण  को भी  तुच्छ समझा था !  आज वह कर्ण भी युद्ध में अर्जुन के हाथों बीरगति को प्राप्त हो गया है !महाभारत का युद्ध धर्म युद्ध था !और जिधर श्री कृष्णा थे वही धर्म था  !और जहाँ धर्म होता है ! विजय भी उसीकी होती है ! !  ! 

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