मुम्बई ब्लास्ट प्रकरण में कानून ने अपना काम उसी प्रकार से किया जैसा अन्य अपराधिक प्रकरणो में होता है !संजय कादुर्भाग्य रहा की उन्होंने कानूनी सलाह पर यह स्वीकार कर लिया कि ये के ५६ रायफल उनसे बरामद हुई थी !जाँच करने वाली एजेंसी ने एक भी सबूत न्यायालय में सिर्फ संजय केस्वयं की स्वीकारोक्ति के अलावा न्यायालय में पेश नहीं किया जिस से यह सिद्ध हो सकता था कि ये के ५६ रायफल उनसे बरामद हुई है !अगर संजय पर मुकद्म्मा टाडा के अंतर्गत ना चलाया गया होता तो आर्म्स एक्ट में अवैध हथ्यार रखने के जुर्म में अधिकतम २ साल की सजा हो सकती थी !और उसमे एक दिन भी संजय को जेल में नहीं रहना पड़ता !न्यायालय में अभियुक्त को कानूनी सलाह के अनुसार ही व्यान आदि देना पड़ते हैं !इसीलिए मामले केसही तथ्य सामने नहीं आ पाते हैं !किन्तु अनुमान से यह कहा जा सकता है की ये के ५६ राफेल रखने में संजय की लापरबाही और बड़े नेता और औरप्रख्यात अभिनेत्री का पुत्र होने के कारण अहंकार ही दिखाई देता है !मुम्बई ब्लास्ट में किसी भी प्रकार की सहभागिता का तो प्रश्न ही नहीं उठता है !
No comments:
Post a Comment