Sunday, 23 August 2015

राजस्थान राजपूत वीरों की कर्मस्थली रहा है !यहाँ पर राजपूतों की शौर्य गाथाएं इस बीर भूमि के कण कण में व्याप्त हैं !यहाँ की वीरांगनाओं ने अपने शील और सतीत्त्व की रक्छा के लिए अपने जीवन को अग्नि के अर्पित कर दिया था !किन्तु विदेशी आक्रान्ताओं के हाथ में पड़कर अपने शील और सतीत्त्व को दूषित नहीं होने दिया !कालांतर में इस भूमि में मानसिंघ आदि ऐसे राजपूत भी हुए जिन्होंने मुग़लों की शरण में जाकर इस वीर भूमि के स्वर्णिम इतिहास को कलंकित किया ! किन्तु राणा रतनसिंघ उदयसिंघ और राणा प्रताप ऐसे वीरों ने मुग़लों की अधीनता स्वीकार नहीं की और अंतिम स्वांश तक अपनी आजादी और धर्म संस्कृति के लिए संघर्ष किया और अपने जीवन की आहुति मातृभूमि और धर्म संस्कृति की रक्छा के लिए कुर्बान कर दी थी ! हांडा रानी और पद्मावती ने सह्स्त्रौं छत्राणियोँ के साथ जौहर कर अपने शरीरों को अग्नि के सम्पर्पतित कर दिया !यह रणथम्बौर का अभेद्द्य दुर्ग भी राजपूतों और राज्पुतानियोँ के शौर्य और बलिदान की अमर गाथा प्रस्तुत करता है !इस इतिहास को संरक्छित कर इसको विद्यार्थियोँ के कोर्स में शामिल कर उनको पढ़ाया जाना चाहिए !

No comments:

Post a Comment