Monday, 3 August 2015

ऐसा कोई धर्म दुनिया में नहीं है !जिसमे  अधर्मी और पाखंडी ना हों !सभी धर्मों में धर्म के रूप में अधर्म होता है !!धर्म से दो धाराएं निकलती है !एक धारा अधर्म पाखंड छल कपट हिंसा कटटरता की होती है !और दूसरी धारा अध्यात्म की होती है !जिसके कारण प्राणिमात्र के प्रति प्रेम सद्भाव करुणा भाई चारा और अहिंसा का उदय होता है !अध्यात्म में मनुष्यों को सभी प्राणियों में एक ही आत्मा (परमात्मा )का निवास दिखाई देता है !इसिलए फिर मनुष्यों के व्योहार में क्रूरता, छल, कपट और धार्मिक कटटरता का अभाव हो जाता है !मनुष्यों के सुख दुःख जीवन मरण, मान अपमान सभी सामान दृष्टि से देखने की प्रवृत्ति जाग्रत हो जाती है  !जैसे पावर  हाउस से आने वाला बिजली का प्रकाश घर की बिजली को स्विच ऑफ करने से बंद नहीं किया जा सकता है !प्रकाश को पूरी तरह से बंद पावर हाउस से बिजली बंद करने से ही हो सकता है !उसी प्रकार धर्म के नाम से छल प्रपंच पाखंड हिंसा क्रूरता को मनुष्यों के प्रयत्न से समाप्त नहीं किया जा सकता है !यह अधर्म परमात्मा की शक्ति के  विरुद्ध अपराध है ! परमात्मा के साथ विश्वास घात है !और यह सब उस परम सत्ता की जानकारी में है ! इसीलिए इसका दंड परमात्मा स्वयं देते हैं !बे ही इन अधर्मी, पापियों, पाखंडियों का विनाश करते हैं !धर्म के रहस्यों ,शक्तियों और सामर्थ्यों को मनुष्य पूर्ण रूप से नहीं समझ सकता है ! धर्म श्रद्धा और आस्था का विषय है !धर्म का कोई विकल्प भी नहीं है !जब से धर्म है ! तब से धर्म के साथ अधर्म और अध्यात्म दोनों जुड़े हुए हैं !राधे माँ के प्रति यह आकर्षण  कोई आश्चर्य  जनक घटना नहीं है !धर्म के प्रति आस्था के कारण ऐसे अनेक व्यक्ति धर्म के प्रति आस्था और विश्वास के कारण ऐसे चमत्कारी व्यक्तियों के आस पास इकट्ठे हो जाते हैं !आस्थावान और श्रद्धालु व्यक्तियों की श्रद्धा धर्म के प्रति होती है !धार्मिक शक्ति प्रदर्शन करने वाले व्यक्ति के प्रति नहीं होती  है ! इसीलिए ज्यादा नुकशान श्रद्धालुओं का नहीं होता  है !किन्तु पाखंडियों को जिन अवर्णीय  कष्टों को भोगना पड़ता है !उसका प्रत्यक्च उदहारण इन तथाकथित धार्मिक पाखंडियों को जेल की सींखचों के अंदर देखा जा सकता है !श्रद्धालुओं  की तो सिर्फ धन हानि ही होती है !किन्तु पाखंडियों के तो लोक परलिक दोनों ही नष्ट हो जाते है !

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