Tuesday, 18 August 2015

भारतीय राजनीति में और प्रशासन में लगभग ८०%से अधिक बे लोग है !जो अत्यंत साधारण परिवारों से उठकर प्रधान मंत्री मंत्री मुख्यमंत्री सांसद विधायक ग्रामप्रधान मेयर और  नगरपालिकाओं आदि में जनता के द्वारा भेजे गए प्रितिनिधि के रूप में आसीन है !सरकारी सेवाओं में भी प्रशानिकाधिकारी से लेकर सामान्य चपरासी तक की नौकरी में अधिकाँश आरक्छण के माध्यम से निम्न माध्यम श्रेणी के लोग अधिकाँश पदों पर पदासीन है !किन्तु पदाशीन होते ही इन लोगों के जीवन स्तर में गगन चुम्बी विकास होता है !और धन ऐश्वर्य भोग विलास में राजे महाराजे भी इनका मुकाबला नहीं कर पाते हैं !आरक्छण अब न्याय का पोषक और दलितों पिछड़ों के उत्थान  और विकास का माध्यम ना होकर दलित और पिछड़ी जातियों के कुछ नेताओं के स्वार्थ का पोषक और उनकी तथा उनके परिवार की उन्नत्ति का साधन  बन गया है !कोई भी सवर्ण जाति की गरीबी और लाचारी पर ध्यान नहीं दे रहा है !बे अन्याय और उपेक्छा की जिंदगी जी रहे हैं !लालू प्रसाद ,रामविलास शरद यादव नितीश कुमार  मुलायम सिंह आदि सभी नेता जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से ही निकल कर राजनीति में आये हैं !इन सबकी आर्थिक स्थिति अत्यंत सामान्य थी !और ये सभी नेता प्रारम्भ में त्यागी और आदर्शवादी रहे हैं !किन्तु अब ये कहाँ पहुँच गए है !ये आमजनता के सामने है !  एक और दलित नेत्री कांशीरामजी के बहुजन समाज के आंदोलन से निकली है !वह भी कैसा जीवन जी रही हैं !यह भी सबके सामने है !अभी भी इन नेताओं के पास समय है !और ये राजनीति में महत्त्व पूर्ण पदों पर आसीन है !इनको अपनी पूर्व स्थिति का ध्यान करके राजनैतिक दृष्टि का त्याग कर और हार बा    जीत    की परवाह ना कर बिना किसी पक्छपात के न्याय पूर्ण दृष्टि से देश का सभी निर्धन पिछड़े लोगों को अभाव मुक्त करने के लिए काम करना चाहिए !तभी ये सच्चे अर्थों में नेता सिद्ध होंगे !और इनकी यह चर्चा  करने की सार्थकता सिद्ध होगी ! की ये प्रधान मंत्री मुख्यमंत्री सांसद विधायक बन ने  के पूर्व चाय बेचते थे या ढोर चराते थे

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