Saturday, 8 August 2015

९ अगस्त 1942 भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में विशेष स्थान रखता है !जब  ब्रिटिश सरकार ने द्वितीय महायुद्ध में बिना भारत की सहमति के भारत को युद्ध में भाग लेने वाला देश घोषित कर दिया !तो उसने भारत के सामने एक चुनौती खड़ी कर दी !इसी चुनौती का मुकाबला करने के लिए अंग्रेजो भारत छोडो के नारे का जन्म हुआ था !गांधी जी ने जब यह नारा दिया !तो बहुतों को यह निरा पागलपन ही मालुम हुआ !परन्तु गांधी जी अपने निर्णय पर दृढ रहे !उन्होंने कहा था !कि सारी दुनिया के राष्ट्र मेरा विरोध करें ! और सारा भारत मुझे समझाए कि मै गलती पर हूँ तो भी में भारत की खातिर ही नहीं परन्तु सारे संसार के खातिर भी इस दिशा में आगे बढूंगा ! ऐसे आतंरिक विश्वास और संकल्प के साथ जिसे देख कर सभी चकित हो गए  !,उन्होंने सारे विरोध को जीत लिया ! और अपने पुराने साथियों को अपने साथ एक और लड़ाई के लिए एकत्र कर लिया --- यह लड़ाई विदेशी शासन के विरुद्ध अंतिम लड़ाई थी  !,सबसे बड़ी लड़ाई थी !और पिछली सभी लडायिओं सेश्रेष्ठ भी थी ! ८ अगस्त १९४२ का अंग्रेजो भारत छोडो का कांग्रेस का प्रस्ताव भारत के स्वाधीनता संग्राम की इतिहास में एक अहम निर्णय था !यह मात्र नारा नहीं था बल्कि आत्मशासन के लिए छट पटाती हुई भारतीय आत्मा की प्रवल पुकार थी !गांधी जी की अंतर आत्मा की पुकार पर अंग्रेजो भारत छोडो का नारा थोड़े ही समय में अंग्रेजो एशिया छोडो में तब्दील हो गया  था ! जब कांग्रेस कार्य समिति शांतिपूर्ण समझौते की बात करने की कोशिश कर रही थी ! उसी  समय सारी कांग्रेस कार्य समिति को एक ही धावे   में जेल में डाल दिया गया  ! भारत छोडो आंदोलन की प्रचंड बाढ़ को तत्काल तो दबा दिया गया था ! परन्तु उसने जनता में जो उत्साह और जोश उत्पन किया ! वह बढ़ता ही गया ! शस्त्र पहरे और आगा खान महल के नजर बंदी केम्प के कटीले तारों के घेरे में बंद रह कर भी गांधी जी भारत की अजेय आत्मा के प्रतीक और लोगों के लिए श्रद्धा और आशा के दीप स्तम्भ बन गए थे ! गांधी जी के विरद्ध ब्रिटिश हुकूमत पूरी तरहसे झूठा प्रचार कर रही थी !  तथा जनता का क्रूरता पूर्वक दमन भी  कर रही थी ! इस झूठे प्रचार के विरोध के रूप में और जनता का जो दमन ब्रिटिश सरकार द्वारा किया  जा रहा था  !और उस कारण से जनता को जो कष्ट हो रहा था ! उनके लिए जेल में रहते हुए ही भी हिस्सा लेने के एकमात्र उपाय के रूप में गांधी जी ने २१ दिन का उपबास शुरू कर दिया था ! उपबास के उत्तर में ब्रिटिश सरकार ने गांधी जी के दाह संस्कार के लिए चन्दन की लकड़ी मंगा ली थी ! नजर बंदी केम्प के चारों और पहरा दुगना कर दिया था और उनकी मृत्यु पर होने  वाले सार्वजानिक प्रदर्शनों को दबा देने के लिए भी पूरा प्रबंध सरकार ने करलिया था ! अंत में गांधी जी ऐसे बीमार पड़े  की लगभग  मृत्यु के नजदीक पहुँच गएथे ! जब रात्रि अत्यंत अन्धकार पूर्ण दिखाई दे रही थी ! और सारी आशाएं लुप्त हो चली थी ! ठीक उसी समय जेलके दरवाजे अचानक खुल गए  !और गांधी जी को जेल से रिहा कर दिया गया  ! किन्तु जेल में गांधी जी की पत्नी कस्तूरबा गांधी और उनके सचिव महादेव देसाई की मृत्यु हो गयी थी  !ब्रटिश सरकार यह नहीं चाहती थी की दो मृतुओं के साथ नजरबंदी केम्प में उनके हाथों तीसरी मृत्यु गांधी जी की हो ! भारत छोडो संग्राम के दिनों में बहुत से कांग्रेसी अपने मूल आधार से विचलित हो गए थे ! कोंगेस के बड़े नेताओं की एक साथ गिरफ्तारी होने के कारण  कोंग्रेसियों ने अहिंसा का अलग अलग अर्थ लगाया ! कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी के तत्काल बाद ब्रिटिश सरकार के भारत मंत्री एमरी ने जो रेडियो पर भासण दिया उसमे उन्होंने गांधी जी और कोंग्रेसिपों पर तोड़ फोड़ के अनेक आरोप लगाए थे ! और उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल थे !कुछ कोंग्रेसी भूमगत  हो गए थे ! और गुप्त रहकर आंदोलन चलाने लगे थे !समाजवादी नेता  जयप्रकाश नारायण गुप्त आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए जेल से भाग गए थे  !और उनकी गिरफ्तारी के लिए सरकार ने १०००० रुपये का  इनाम घोषित किया था ! अरुणा आसफ अली भी गुप्त आंदोलन चला रही थी ! उन पर भी सरकार ने इनाम की घोषणा की थी ! !अंग्रेजो भारत छोडो संग्राम के दौरान  दो नयी  विचार धाराएं उत्पन्न हो गयी थी ! उनमे से एक विचार धारा के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में समाजवादी थे ! जो खले तौर पर कहते थे ! कि कार्यक्रम के रूप में अहिंसा का कार्य अब पूरा हो गया है !उसका काम सर्व साधारण को जगाना था ! वह उसने कर दिया ! अब  आजादी की अंतिम लड़ाई में जिसका आरम्भिक दौर अहिंसा का था !  शस्त्रों के उपयोग के संपूर्ण निषेध का आग्रह अब स्वीकार नहीं किया जा सकता  है ! दूसरी विचार धारा वाले अहिंसा के सिद्धांत में विश्वास तो करते थे ! परन्तु उनका कहना था कि अहिंसा की कार्य प्रणाली में संशोधन और विकास की गुंजाइश है ! बे इसे नव सत्याग्रह या नव गाँधीबाद कहते थे ! इस संशोधित कार्य प्रणाली में व्यापक रूप में तोड़ फोड़ ,गुप्त प्रवृत्ति और समानान्तर सरकार का संगठन करने का समावेश होता था  !भारत छोडो संग्राम के दिनों में देश के कई भागों में उत्तरप्रदेश के बलिया जिले में ,बंगाल के मिदनापुर जिले में मुम्बई के सतारा जिले में और बिहार के बड़े भू भाग में ----ब्रिटिश शासन का अंत कर दिया गया था ! और उसके स्थान पर समानान्तर प्रशासन स्थापित कर दिया गया था  !जिसे मिदनापुर में जातीय सरकार और सातारा में पत्री सरकार कहा जाता था ! इन सरकारों ने पंचायते कायम की, जनता के झगड़े निपटाये ,और गद्दारों को सजाएं दी !इस प्रकार अंग्रेजो भारत छोडो के नारे ने देश को आजादी की किरण जला दी थी ! जिसका पूर्ण प्रकाश ५१ अगस्त १९४७ को हुआ

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