लोकहित ,दया ,प्रेम ,करुणा ,सद्भाव ,मानवता के कार्य परिस्थिति रूचि और स्वभाव के अनुसार बिना किसी प्रचार के अनेक प्रकार और अनेक ढंग से पीड़ित ,उपेक्छित व्यक्तियों की मदद करने के लिए किये जा सकते हैं !आज कल कुछ सामाजिक और राजनैतिक तथा गैर सरकारी संगठन ऐसे भी है !जो सद्कर्म की बात तो करते हैं !प्रचार भी करते हैं !किन्तु काम नहीं करते हैं !सिर्फ बाह बाही और राजनितिक लाभ तथा सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए सामजिक कार्य करने का चोला ओढ़ लेते है ! और गैर सरकारी संगठन समाज सेवा के नाम से प्राप्त अनुदान को हजम करने की योजनएँ समाज हित के नाम पर बनाते रहते हैं !दूसरी और ऐसे पुरुष और महिलायें है !जो अपनी रूचि और परिस्थति के अनुसार पीड़ित उपेक्छित लोगो की मदद करते रहते हैं !बृद्ध पुरुषों की सबसे बड़ी समस्या उपेक्छा की होती है !जिन बच्चों को बे पालपोश कर बड़ा करते हैं !और जब बे अपने बृद्ध माता पिता को बृद्धाश्रम में छोड़ आते हैं !तब भले ही उनकी भोजन और रहने सहने की व्यबस्था हो जाती है !किन्तु बे अपने पुत्र और परिवार जन की उपेक्छा से दुखी रहते हैं !इस सेवा भावी महिला ने बृद्धों की इस पीड़ा को आत्मसात कर यह जो श्रेष्ठ मार्ग अपनाया है !उसके लिए धन्यबाद के शपथ कम पड़ जाते हैं !किन्तु इस महान समाज सेविका से अगर समाज सेवी स्त्री पुरुष प्रेरणा ग्रहण कर पीड़ित उपेक्छित व्यक्तियों की मदद करने में प्रवृत्त हो जाए ! तो यही इस महिला के कार्य का असली धन्यबाद होगा !
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