Sunday, 23 August 2015

श्रष्टि के विनाश का रहस्य इस गुफा में छिपा हुआ है !किन्तु श्रिष्टि के विनाश का काल गीता के अध्याय ८ (१७ ,१८ )में बताया गया है !गीता में बताया गया है की ब्रह्मा का एक दिन १००० चतुर युगी का  (सतयुग ,त्रेता ,द्वापर ,कलियुग ) होता है !और इतने ही समय की रात्रि होती है  !ब्रह्मा के दिन के साथ ही अव्यक्त ब्रह्मा के सूक्छम  शरीर से संपूर्ण उद्भिज जरायज अण्डज और स्वेदज शरीर उत्पन्न होते हैं ! और ब्रह्मा की रात्रि के आरम्भ काल में उस अव्यक्त नाम वाले ब्रह्मा के शुक्छम  शरीर में ही संपूर्ण शरीर कर्मों सहित लीन हो जाते हैं ! वही यह प्राणी समुदाय उत्पन्न हो हो कर प्रकृति स्वभाव के परवश होकर ब्रह्मा के दिन के समय उत्पन्न होता है ! और ब्रह्मा की रात्रि में ब्रह्मा के शूक्छम  शरीर में लीन हो जाता है ! तथा यह जन्म मरण का सिलसिला सभी शरीरों का तब तक जारी रहता है जब तक आत्मा मोक्ष को प्राप्त नहीं हो जाती है !ब्रह्मा का एक दिन ४२५ करोड़ वर्ष का होता है !और इतने ही समय की रात्रि होती है !ब्रह्मा के एक दिन में १४ मन्वन्तर होते है !इस समय ७ वां मन्वन्तर चल रहा है !इसका अर्थ यह हुआ की अभी ब्रह्मा का आधादिन ही व्यतीत हुआ है !अभी श्रष्टि के विनाश काल के लिए २१२ करोड़ बरष का समय शेष है !इसलिए इस गुफा में जो श्रष्टि के विनाश का रहस्य छिपा हुआ है !उस विनाश काल की गड़ना गीता ८ (१७,१८,१९) के अनुसार करनी चाहिए !

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