आरक्छण मात्र दस बर्ष के लिए किया गया था !किन्तु अब यह राजनेताओं के स्वार्थों के कारण स्थायी स्वरुप ग्रहण कर चुका है !आरक्छण की संबिधान में व्यबस्था डॉ अम्बेडकर ने की थी !किन्तु बे भी आरक्छण के लगातार विस्तार को देखने के लिए जीवित नहीं रहे !अगर डॉ अम्बेडकर आरक्छण को स्थायी बनाना चाहते तो उन्हें ऐसा करने से कौन रोक सकता था !जिस प्रकार से दलितों के लिए आरक्छण का क्रियांबन किया जा रहा है !इस प्रकार से तो एक लाख बर्ष में भी आरक्छण अंतिम दलित तक नहीं पहुँच पायेगा !सरकारों ने कभी इस बात का जानने का प्रयत्न नहीं किया कि आरक्छण सभी आरकच्छित जातियोँ तक पहुँच रहा है !या नहीं ?आरक्छण दलित नेताओं के लिए बरदान बन गया है !और इसका लाभ कुछ दलित जातियां ही उठा रही हैं !और अब दलित भी अत्यंत धनी और निर्धन में बिभाजित हो गए हैं !इसलिए अब आरक्छण के स्वरुप को बदलने की आवश्यकता है !इसको जातिगत आधार पर ना देकर आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए !जो स्थिति आरक्छण की सुविधा की दलितों की है वही पिछड़ों की भी है !उसमे भी कुछ पिछ्डिजातियां ही लाभान्वित हुई है !हार्दिक पटेल केसाथ जन समूह किसी राजनैतिक नीति के कारण नहीं खड़ा हुआ है !हार्दिक की आवाज जनता की आवाज है !उसमे राजनैतिक हित अनहित की शोध करना व्यर्थ है !यह बात दूसरी है की इस आंदोलन के कारण किसी राजनैतिक दल को लाभ हो जाय और किसी की राजनीति की दूकान बंद हो जाय !
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