आरक्छण जिसका जन्म वंचितों उपेक्छितों और दलितों को तथाकथित सवर्ण जातियोँ के समकछ लाने के लिए हुआ था !अब घोर अन्याय का पोषक बन गया है !और दलितों पिछड़ों आदि जातियोँ के नेताओं को बरदान बन गया है !अब इन जातियोँ के कुछ नेता तो राजाओं महाराजाओं जैसा जीवन जी रहे है !और कुछ दलित और पिछड़े लोग इन नेताओं के स्वार्थ के कारण आरक्छण का लाभ अभी भी नहीं ले पा रहे हैं ! एक दो दलित जातियोँ और पिछड़ों को ही आरक्छण और कुछ ख़ास दलित परिवारों को ही इसका लाभ प्राप्त हो पाया है !जिन तथाकथित सवर्ण जातियोँ की उपेक्छा की गयी है !उनमे भी भयानक गरीबी और पिछड़ापन है !उनमे कुछ लोग जो धन धान्य से संपन्न है !बे ही उच्च पदों पर आसीन है और उन्ही के हाथों में व्योपार आदि है !शेष सवर्ण तो गरीबी और भुखमरी के शिकार है !नेता लोग आकंठ स्वार्थ में डूबे हुए हैं !और अपने घर परिवार और अपनी उन्नति में ही अपने राजनैतिक पद का इस्तेमाल कर रहे हैं !किन्तु अब इस अन्याय पूर्ण आरक्छण के विरुद्ध युवा जागरूक हो कर विरोध में उतर आया है !इसीलिए या तो नौकरियोँ में आरक्छण समाप्त किया जाना चाहिए या इसे न्याय युक्त बनाकर आर्थिक आधार पर होना चाहिए !
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