Saturday, 26 September 2015

इंदौर के शहर काजी का मक्का हादसे पर यह व्यान कि क्या अल्लाह हमसे नाराज है ?का जबाब काजी ने इस्लाम मजहब के हिसाब से दिया है !अगर इस हादसे का जबाब वैदिक धर्म के हिसाब से दिया जाय तो निश्चित तौर पर जो हिंसा और क्रूरतम कृत्य इस्लाम के नाम पर इस्लामिक संगठन और बोकोहराम  आदि जैंसे संगठनो द्वारा किये जा रहे हैं !उस से अल्लाह कभी प्रसन्न नहीं हो सकता है ! ये आततायी संगठन निरपराध लोगों के क्रूरता पूर्वक शीश काट ते हैं !महिलाओं बच्चियों के साथ बलात्कार करते हैं !जबरन धर्म परिवर्तन कराते हैं !और यह सब करते हुए बे कुरआन की आयतें जोर जोर से पढ़ते हैं !और जो इस्लाम को नहीं मानते हैं !उनको काफ़िर कहते है !और घोषणा करते हैं की जो मुसलमान नहीं है !उनका क़त्ल करना जायज है !और उनकी औरतों के साथ बलात्कार करना उनको बेच देना भी जायज है !जबकि वैदिक धर्म कहता है !कि जो सभी धर्मों का आदर करते हैं !सभी देवताओं को शीश झुकाते हैं !और किसी का भी बध नहीं करते हैं !भगवान उनसे प्रसन्न रहते हैं !किन्तु इस्लाम में यह शिक्छा नहीं दी जाती है !१४०० साल पुराना इस्लाम करोङो बर्ष पुराने सनातन धर्म को नष्ट करना चाहता है !उसके पूजास्थल ध्वस्त करता हैं !पाकिस्तान बांग्लादेश इसके प्रमाण है !अतः यह जो हादसा मक्का  में हुआ है !यह निश्चित ही अल्लाह की नाराजी प्रगट करता है !इसलिए मुसलमानो को इस्लाम के शांति और सद्भाव तथा सबधर्मों के प्रति आदरभाव को विकसित करना चाहिए !और जैसे वैदिक धर्मों में सभी धर्मों का आदर किया जाता है !उसी प्रकार से इस्लाम को भी सभी धर्मों का आदर करना चाहिए !भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि जो मनुष्य सम्पूर्ण स्थावर जंगम ,चर अचर आदि संपूर्ण प्राणियों में एक ही परमात्मा को परिपूर्ण रूप से स्थित देखता है !और यह अनुभव करता है कि जो परमात्मा की सत्ता हमारे अंदर है !वही परमात्म सत्ता  गाय बकरा आदि में भी है ! तब वह किसी भी प्राणी की हिंसा नहीं करता है ! सब में ईश्वर का दर्शन करता है ! गाय बकरा आदिकी कुर्बानी नहीं करता है ! बल्कि उनका पालन पोषण अपने शरीर और पुत्र आदि की तरह करता है १३(२८) ! जो ऐसा नहीं करता है !वह अपनी आत्मा का स्वयं नाश करता है !वैदिक धर्म की दृष्टि से अगर इस्लामिक संगठन आदि की हिंसात्मक गतिविधियों पर निर्णय दिया जाय !तो यह निष्कर्ष निकलेगा कि अभी तो मक्का  हादसे में सिर्फ अल्लाह ने अपना गुस्सा ही प्रगट किया है !अगर मुसलमानो ने अपनी जीवन दृष्टि और आचरण पद्धति में जीव रक्छा को स्थान नहीं दिया !तो निश्चय ही  अल्लाह का कहर बरपा होगा !

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