Friday, 11 September 2015

यह कथा की श्रीकृष्ण और द्रौपदी में विवाह की कोई बात चीत  चली थी !गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित महाभारत में नहीं है ! महाभारत एक मात्र ऐसा ग्रन्थ है !जिसमे उस काल की सारी घटनाओं का सही विवरण प्रस्तुत किया गया है ! द्रौपदी का विवाह तो स्वयम्बर में एक शर्त को पूरा करने के बाद ही हुआ था !उस स्वयम्बर में देश देशान्तर के सभी विवाह के इक्छुक राजा  उपस्थित थे !पांडव ब्राह्मण बेश में थे !तथा सभी पांडव ब्राह्मण वेश में एक कुम्भकार (कुम्हार के घर में निवास कर रहे थे )और भिक्छा मांगकर अपना जीवन यापन करते थे !द्रौपदी के स्वयम्बर में किसी को भी यह जानकारी नहीं थी !कि ब्राह्मण के बेश में पांडव मौजूद हैं !जब सभी राजा स्वयम्बर की शर्त पूरी करने मै असफल हो गए !तब ब्राह्मण वेश धारी अर्जुन ने स्वयम्बर की शर्त पूर्ण की !उस काल में स्वयम्बर प्रथा सिर्फ छत्रियों में ही प्रिचलित थी !ब्राह्मण स्यम्बर में शामिल नहीं हो सकते थे !इसका स्वयम्बर में उपस्थित दुर्योधन कर्ण जरासंध शल्य शिशुपाल आदि राजाओं ने विरोध भी किया था !उस स्वयम्बर में श्री कृष्ण और बलराम भी उपस्थित थे !और इस स्वयम्बर के पहले पांडवों और श्रीकृष्ण की मुलाक़ात  का महाभारत में कोई कथानक नहीं है !भगवान श्री कृष्ण ने यह अनुमान लगाया कि ब्राह्मण वेश में अर्जुन ही हो सकते है ! इसके बाद कुम्भकार के घर में श्री कृष्ण और बलराम की प्रथम मुलाक़ात होती है !यह बात सभी ने स्वीकार कर ली थी कि पांडवों की मृत्यु लाक्छाग्रह  में हो चुकी है !धृतराष्ट्र सहित सभी कौरवों ने पांडवों और कुंती आदि का श्राद्ध भी कर दिया था !सखी शब्द गीता में १(२६)में आया है !और वह भी कुरुक्छेत्र में उपस्थित सभी योद्धाओं का वर्णन करते हुए !अर्जुन ने किया है !सखी शव्द का प्रयोग मित्र के लिए किया गया है !और यह संस्कृत में स्त्रीलिंग नहीं है !द्रौपदी भी श्रीकृष्ण से यह कहती है !की आपको मेरी मदद इसीलिए करनी चाहिए क्योँकि (१)में यज्ञ से उत्पन्न हुई हूँ १(२)में आपकी सखी हूँ!(३) आप मेरी मदद करने में समर्थ हैं !यह बात द्रौपदी भगवान श्री कृष्ण से जब कहती है !जब श्रीकृष्ण कौरवों और पांडवों के मध्य शांति स्थापित कराने के लिए हस्तिनापुर  को प्रस्थान कर रहे थे !द्रौपदी  कौरवों को उसके साथ राज दरबार में कौरवों और कर्ण द्वारा किये गए  अपमान का बदला लेना चाहती थी !इसीलिए वह कौरव पांडवों के मध्य युद्ध अवश्य हो इसकी प्रबल समर्थक थी !और उसने शांति प्रस्ताव  का यह कहकर प्रबल विरोध किया था !कि अगर पांडव कायरता बस कौरवों से संधि कर लेते हैं !तो मेरे पिता भाई और मेरे पुत्र मेरे अपमान का बदला कौरवोँ से युद्ध करके  अवश्य लेंगे ! यहाँ जो बताया गया है !कि श्री कृष्ण के साथ द्रुपद द्रौपदी का विवाह करना चाहते थे !किसी अन्य पुराण आदि में हो सकता है !किन्तु यह प्रसंग महाभारत में नहीं है !

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