Thursday, 10 September 2015

राजनीत से युक्त सम्मेलनों का यही हश्र  होता है !एक पुरानी घटना है !अमृतसर में विश्व हिंदी सम्मलेन का आयोजन हुआ !उसके उदघाटन के लिए तत्कालीन लोकसभा अध्यक्छ आयंगर को आयोजकों ने आमंत्रित किया था !दिल्ली से आयंगर  और प्रख्यात साहित्यकार आचार्य चतुरसेन शाश्त्री एक ही ट्रेन से सम्मलेन में शिरकत करने के लिए सबार हुए !अमृतसर स्टेशन पर आयंगर  का भव्य स्वागत हुआ !शाश्त्री जी रिक्शे पर बैठ कर सम्मलेन में पहुंचे !सम्मलेन में भी ज्यादातर समय आयंगर के स्वागत में बीता !जो वक्ता लोग आये उन्होंने भी हिंदी की चर्चा कम और आयंगर की प्रसंसा अधिक  की !जब शाश्त्री जी बोलने खड़े हुए !तो उन्होंने कहा आयंगर की शादी में आया !दूल्हे का बहुत स्वागत सत्कार हुआ !लेकिन इस स्वागत सत्कार की चमक दमक में हिंदी रूपी दुल्हन की खोज खबर किसी ने नहीं ली !और वह लाज शर्म से ऐसी सिकुड़ी रही कि उसकी चर्चा भी किसी ने नहीं की !यह प्रक्रिया राजनेताओं को महत्त्व प्रदान करने की  मुख्य विषय पर ध्यान नदेने की अब  गहरी हो गयी है !सम्मलेन की आयोजक सरकार ने शाश्त्री जैसे साहित्यकारों को आमंत्रित ही नहीं किया ! ब्यबस्था भ्रष्टाचार ने बिगाड़ दी

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