यद्द्पि लगभग सभी धर्मग्रंथों में भगवान श्री कृष्ण का कंस के कारागार से युमना के जल में ही बासुदेव द्वारा लिया जाना बताया जाता है !किन्तु हरबंश पुराण में इस को विस्तार के साथ नहीं बताया गया है !वहां भगवान श्री कृष्ण के प्रागट्य को बताते हुए कहा गया है कि आधी रात के समय सुन्दर अभिजीत महूर्त का योग प्राप्त होने पर देवकी ने भगवान विष्णु को पुत्र रूप से जन्म दिया और उसी समय यशोदा ने उस कन्या को जन्म दिया !भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य होते ही संपूर्ण जगत में हर्षोल्लास छा गया बासुदेव ने भी रात्रि में प्रगट हुए अपने पुत्र रूप भगवान विष्णु का स्तवन किया ! उन्हें श्रीवत्स के चिन्ह और दिव्य लक्छणो से संपन्न देख कर बासुदेव ने कहा ----प्रभो आप अपने रूप को समेट लीजिये देव ! में कंस के के भय से डरा हुआ हूँ ! इसीलिए ऐसी बात कहता हूँ ! कमलनयन उसने मेरे बहुत से पुत्र मार डाले हैं जो तुमसे जेठे थे ! बासुदेव का यह बचन सुनकर भगवान श्री कृष्ण ने पिता होने के कारण उनकी आज्ञा स्वीकार करली ! और उनसे कहा आप मुझे नन्द गोप के घर पहुंचा दीजिये तथा उनकी नवजात कन्या को यहां उठा लाइए ! ऐसा कहकर उन्होंने अपने चतुर्भुज रूप को समेट लिया तब पुत्रवत्सल वसदेव शीघ्र ही उस बालक को गोद में लेकर रात में ही यशोदा के घर में प्रवेश कर गए ! यशोदा को उनके आने का कुछ पता न चला ! वहां उन्होंने अपने बालक को रख दिया ! और उस कन्या को लेकर अपने निवास स्थान में आने के बाद उसे देवकी की शैय्या पर सुला दिया ! इस प्रकार उन दोनों नवजात बालकों की अदलाबदली करके कृतार्थ हुए वासुदेव जी भय से व्याकुल हो उस घर से बाहर निकल गए ! बासुदेव ने कंस के पास जाकर उसे अपनी सुन्दर कन्या के जन्म का समाचार दिया ! इस प्रकार भगवान कृष्णा के नन्दगोप के यहाँ पहुचने की बात तो सभी धर्म ग्रंथों में कही गयी है !किन्तु बे कैसे और किस मार्ग से पहुंचे तथा जमुना जी कंस के कारागार से सटकर उस काल खंड में बहती थी !इस सम्बन्ध में महात्माओं और धर्मग्रंथों के विचार भिन्न भिन्न प्रतीत होते हैं !और महाभारत के ७वे खंड हरबंश पुराण में तो इस सबका विस्तृत विवरण ही नहीं दिया गया है
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