Saturday, 12 September 2015

अरहर और उड़द की दाल की पहली खेप देश में २३ सितम्बर तक आजायेगी !और बाजारों तक पहुँचने में इस आयातित दाल को काम से काम एकमाह का समय लगेगा !और इसकी सरकारी कीमत राज्य सरकारें करेंगी इसमें भी काफी समय लगेगा !तब तक बाजार में भारतीय फसलों में उत्पादित अरहर मूंग उरद  की डालें बाजारों में आचुकी होंगी !और भारत में उत्पादित दलों को किसानो को सस्ता बेचना पड़ेगा !और नुक्सान भारतीय किसानो को उठाना पड़ेगा !उरद की दाल तो लगभग तैयार हो चुकी है !और उसका तो बाजारों में आना शुरू भी हो चुका है !अब समझने की बात यह है !कि फसल पर मूंग उरद अरहर की दालें कृषकों से सस्ते में खरीदी गयी थी !और व्योपरियों ने महगी बेचकर भारी मुनाफा कमाया  !और अभीभी कमा रहे हैं !और अब  जब किसानो की दालों की फसल तैयार होके बाजार में आने वाली है !तब ये आयातित दालें आगयी हैं !इस से भी किसानो को ही नुक्सान होने वाला है !किसान फसल खराब होने से परेशान ! अकाल और सूखा पड़ने से परेशान !और कृषि में उत्पादित अनाज दालों की उचित कीमत प्राप्त ना होने से परेशान !अब किसानो को इन तमाम प्रकार की परेशानियों से मुक्ति कैसे मिले ?सरकार जो कदम किसानो के हित में उठाती है ! उनसे भी उसे नुक़सानहोता है !और जो नहीं उठाती है ! उनसे भी उसे नुकसान होता है !प्राचीन भारत कृषि गाय पालन और व्योपार को वार्ता धर्म कहा जाता था !और प्रत्येक राजा इस बार्ता धर्मकी पूरी रक्छा करता था !इस समय इस वार्ता धर्मकी रक्छा नहीं हो रही है !और निकट भविष्य में इसकी रक्छा कोई भी सरकार नहीं कर सकेगी !क्योंकि सारे तंत्र में रुपया कमाने और किसीभी प्रकार से सत्ता महत्ता प्राप्त करने की अवांछनीय आकांछा बढ़ गयी है !यह सुधार जनसहयोग से ही संभव हो पायेगा !और जन सहयोग का स्वरुप सर्व तंत्र रचनात्मक सहयोग से होगा !इसको रोकने में अकेलीसरकार या अकेली जनता सफल नहीं हो सकेगी !इसकी सफलता तो समाज शरीर के सभी भागों के सहयोग से ही होगी !किन्तु यह कब तक होगी ?कैसे होगी ?इसका रोड मैप कब बनेगा ? कौन बनाएगा ?ये प्रश्न सब समय के पास है !किसी व्यक्तिया संस्था के पास नहीं है. !

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