राजनैतिक स्वार्थ सिद्धि की सीमा ये भारतीय राजनेता कब समझेंगे ?और कब भारत की जनता को गुमराह और युवाओं को भ्रमित करने का काम बंद करेंगे? इन आँख के अंधे और दिमाग से शून्य व्यक्तिगत सत्ता सुख की व्यग्रता में संलग्न इन राजनेताओं को इस लोकतंत्र का स्वरुप और स्वभाव तथा राजतंत्र के समूल नाश के इतिहास की और ध्यान भी क्योँ नहीं जाता है ?! यह भी नहीं देखना समझना चाहते हैं !कि यह लोकतंत्र की ही शक्ति है जिसने इन्हे सत्ता और महत्ता में प्रवेश करा दिया है !जो समाज में बंचित और उपेक्छित तथा पीड़ित समझे जाते थे !बे ही आज शासन प्रशासन के शीर्ष पर बैठे हुए हैं !और राजनैतिक सत्ता में भी महत्त्व पूर्ण भागीदारी भी कर रहे हैं !किन्तु बे इस बात को नजरंदाज कर रहे हैं !कि लोकतंत्र में सत्ता आमजन के बिकास के लिए होती है !व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के लिए नहीं !और इसके लिए निर्मित कानूनो का पालन उन्हें भी करना पड़ता है ! और लोकतंत्र के स्वरुप और स्वभाव के अनुसार सामान्य से महत्त्व पूर्ण और महत्त्वपूर्ण से सामान्य बन ने की सहज प्रक्रिया को दिल और दिमाग से स्वीकार करना पड़ता है !लोकतंत्र में सभी प्रकार के अधिकार कर्त्तव्य करने के लिए प्राप्त होते हैं !अपने घर परिवार और व्यक्तिगत सुख समृद्धि के विस्तार के लिए प्राप्त नहीं होते हैं !जब राजाओं ने राज्य को अपने सुख और स्वार्थ प्राप्ति का साधन बनाया तो लाखों साल का राज तंत्र भी सूखे पत्तों की तरह हवा में उड़कर नष्ट हो गया !फिर लोकतंत्र तो अभी अपने शैशव काल में ही हैं !इस लोकतंत्र का पालन कीजिये !इसको कर्त्तव्य त्याग और निष्पक्छता से जिन महापुरुषों ने इस लोकतंत्र के लिए सिद्धांत निष्ठा के साथ अपने जीवन की कुर्वानी दी और जिन्होंने जीवित रहकर लोकतंतांत्रिक निष्ठाओं का जीवन पर्यन्त पालन किया !तथा आज जिनका स्मरण सम्पूर्ण विश्व आदर से करता है !उनके चित्र और चरित्र को अपने राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए गलत ढंग से प्रस्तुत कर देश के युवाओं को भटकाने का काम बंद कीजिये !और खुद जिस डाल पर बैठे हो उसको काटना बंद कीजिये !भारत माता की जय सिर्फ शब्दों में ही नहीं उनको दिल दिमाग में बैठाकर अपने कर्तव्यों का पालन कीजिये !
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