Thursday, 10 September 2015

एक संस्कृत उक्ति का का भावानुबाद  करते हुए बिनोबा जी ने साहित्य की व्याख्या बतायी थी --- जो सत्य का यशोगान करे ,जीवन का अर्थ समझाए व्योहर की शिक्छा दे और चित्त की शुद्धि करे वो है  साहित्य!  समर्थ राम दास ने ऐसे प्रतिभा संपन्न साहित्य कारों को शव्द श्रृष्टि का ईश्वर कहा है !इस सम्मलेन में साहित्य की यह व्याख्या  सिद्ध होती नहीं दिखाई देती है ! यह राजनीति  प्रभावी हिंदी साहित्य सम्मलेन है  !इसीलिए इसके उदघाटन  कर्ता प्रधान मंत्री जी और आयोजन कर्ता मुख्य मंत्री और समापन कर्ता के रूप में  अमिताभ बच्चन को आमंत्रित किया गया है !इस आयोजन  में सम्मिलित होने वाले और इसकी प्रसंसा करने वाले साहित्यकार भी राजनैतिक दृष्टि से ही आमंत्रित किये गए हैं !और इस आयोजन के आलोचक भी इसकी आलोचना राजनैतिक दृष्टि से  ही कर रहे हैं !जिन आलोचकों के नाम यहां दिखाए गए है ! उसमे से अधिकाँश संघ और भाजपा के  विरोधी हैं !और जो आमंत्रित किये गए हैं ! उनमे से अधिकाँश भाजपा और संघ के  समर्थक हैं !इसके विरोध और समर्थन में शुद्ध साहित्य उपासक या साहित्यकार के दर्शन नहीं होते हैं !हिंदी  का गुण गान हो रहा है यह उपलब्धि है !

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