अब में इस पर जो विचार व्यक्त कर रहा हूँ !बे सबके सब इतिहास पर आधारित है !इसीलिए ऐसा न हो की जैसे मेने अभी कुछ समय पूर्व इस्लामिक संगठन के भारत में बढ़ते प्रभाव पर कमेंट किया था !तो आपने उसे मॉडरेटर के पास भेज दिया था !इसके पूर्व भी मेरे कुछ कमेंट मॉडरेटर के पास भेजे जा चके है किन्तु यह पता मुझको कभी नहीं चला की मॉडरेटर ने उनकमेंट में क्या खामी पायी फिर उस कमेंट का क्या हुआ ?
लाल बहादुर शाश्त्री कांग्रेस के उन तपे हुए नेताओं में थे जिनका बाहुल्य नेहरू मंत्रिमंडल में था !कांग्रेस के सभी मंत्री प्रधान मंत्री सहित चरखा चलाते थे !और अपने उपयोग के लिए खादी को स्वयं बुनते थे !उस समय पद प्राप्ति के लिए बहुत प्रतिस्पर्धा नहीं थी !बहुत से गांधीवादियोँ ने मंत्री बनाने से ही इंकार कर दिया था !लाल बहादुर शाश्त्री का राजनैतिक जीवन इलाहाबाद की म्युनिसिपल कारपोरेशन से शुरू हुआ था !बे लगभग ५० साल तक म्युनिसिपेलिटी की सदस्य्ता से लेकर देश के प्रधान मंत्री बनने तक शाशन में रहे ! किन्तु मृत्यु के समय उनके ऊपर बैंक का कर्ज था ! जो उन्होंने कार खरीदने के लिए लिया था !तथा उनके पास रहने के लिए अपना मकान भी नहीं था !उनके त्याग मय जीवन के अनेकों उदहारण है !वेसे कहने के लिए उनके जीवन में ऐसा कुछ भी नहीं था !जो उनके आदर्श जीवन को संदिग्ध बनाता हो !एक उदाहरण उनकी सादगी और ईमानदारी का में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ !कांग्रेस में कामराज योजना में सभी केंद्रीय मंत्रियोँ ने त्याग पात्र दे दिया था !शाश्त्री जी ने मंत्री परिषद से त्यागपत्र देते ही सार्वजानिक बस से यात्रा करनी शुरू कर दी थी !उन्ही दिनों कश्मीर में मुहमद साहब के बाल की चोरी की घटना सामने आई !नेहरूजी ने शाश्त्री जी को मंत्री पद की शपथ दिलाकर कश्मीर जाकर उस प्रकरण के समाधान के लिए जाने को कहा !जब शाश्त्री जी जाने लगे तब नेहरूजी ने शाश्त्री जी से पूंछा की कश्मीर में ठण्ड बहुत पड़ती है !उनके पास गरम कोट है या नहीं ?शाश्त्री जी ने जब कहा की उनके पास गर्म कोट नहीं है !तब नेहरूजी ने अपना गरम कोट उनको दिया जिसको अपने नाप के अनुसार ठीक करा कर शाश्त्री जी कश्मीर गए !नेहरूजी के आनंद भवन की कुड़की नगर निगम ने इसीलिए करा ली थी क्योँकि उसका गृह कर जमा नहीं किया गया था !शाश्त्री जी ने १९६५ के युद्ध के बाद जय जबान जय किसान का नारा दिया था !और भारत के लोगों से अपील की थी की लोग एक समय का भोजन त्याग दें !सारे देश में उस दिन किसी भी होटल में सायंकाल का भोजन नहीं बनता था और न मिलता था !इस तरह के त्यागी तपस्वी नेता गुलजारी लाल ननदा सरदार पटेल डॉ राजेंद्र प्रसाद आचार्य कृपलानी मौलाना अब्दुलकलाम रफीअहमद किदवई आदि अनगनित नेता भारतीय राजनीति में थे !इस समय भी कुछ ऐसे राजनेता हैं ! किन्तु उनका बाहुल्य नहीं है !जब राजनीति त्यागनिष्ठ और सदाचार प्रधान होती है तब देश की अन्य संस्थाए भी ठीक से काम करती हैं !
लाल बहादुर शाश्त्री कांग्रेस के उन तपे हुए नेताओं में थे जिनका बाहुल्य नेहरू मंत्रिमंडल में था !कांग्रेस के सभी मंत्री प्रधान मंत्री सहित चरखा चलाते थे !और अपने उपयोग के लिए खादी को स्वयं बुनते थे !उस समय पद प्राप्ति के लिए बहुत प्रतिस्पर्धा नहीं थी !बहुत से गांधीवादियोँ ने मंत्री बनाने से ही इंकार कर दिया था !लाल बहादुर शाश्त्री का राजनैतिक जीवन इलाहाबाद की म्युनिसिपल कारपोरेशन से शुरू हुआ था !बे लगभग ५० साल तक म्युनिसिपेलिटी की सदस्य्ता से लेकर देश के प्रधान मंत्री बनने तक शाशन में रहे ! किन्तु मृत्यु के समय उनके ऊपर बैंक का कर्ज था ! जो उन्होंने कार खरीदने के लिए लिया था !तथा उनके पास रहने के लिए अपना मकान भी नहीं था !उनके त्याग मय जीवन के अनेकों उदहारण है !वेसे कहने के लिए उनके जीवन में ऐसा कुछ भी नहीं था !जो उनके आदर्श जीवन को संदिग्ध बनाता हो !एक उदाहरण उनकी सादगी और ईमानदारी का में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ !कांग्रेस में कामराज योजना में सभी केंद्रीय मंत्रियोँ ने त्याग पात्र दे दिया था !शाश्त्री जी ने मंत्री परिषद से त्यागपत्र देते ही सार्वजानिक बस से यात्रा करनी शुरू कर दी थी !उन्ही दिनों कश्मीर में मुहमद साहब के बाल की चोरी की घटना सामने आई !नेहरूजी ने शाश्त्री जी को मंत्री पद की शपथ दिलाकर कश्मीर जाकर उस प्रकरण के समाधान के लिए जाने को कहा !जब शाश्त्री जी जाने लगे तब नेहरूजी ने शाश्त्री जी से पूंछा की कश्मीर में ठण्ड बहुत पड़ती है !उनके पास गरम कोट है या नहीं ?शाश्त्री जी ने जब कहा की उनके पास गर्म कोट नहीं है !तब नेहरूजी ने अपना गरम कोट उनको दिया जिसको अपने नाप के अनुसार ठीक करा कर शाश्त्री जी कश्मीर गए !नेहरूजी के आनंद भवन की कुड़की नगर निगम ने इसीलिए करा ली थी क्योँकि उसका गृह कर जमा नहीं किया गया था !शाश्त्री जी ने १९६५ के युद्ध के बाद जय जबान जय किसान का नारा दिया था !और भारत के लोगों से अपील की थी की लोग एक समय का भोजन त्याग दें !सारे देश में उस दिन किसी भी होटल में सायंकाल का भोजन नहीं बनता था और न मिलता था !इस तरह के त्यागी तपस्वी नेता गुलजारी लाल ननदा सरदार पटेल डॉ राजेंद्र प्रसाद आचार्य कृपलानी मौलाना अब्दुलकलाम रफीअहमद किदवई आदि अनगनित नेता भारतीय राजनीति में थे !इस समय भी कुछ ऐसे राजनेता हैं ! किन्तु उनका बाहुल्य नहीं है !जब राजनीति त्यागनिष्ठ और सदाचार प्रधान होती है तब देश की अन्य संस्थाए भी ठीक से काम करती हैं !
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