Wednesday, 16 September 2015

गाय को हिन्दू मुसलिम ईसाई आदि धर्मों से जोड़कर इसकी रक्छा की बात नहीं होनी चाहिए !इसकी दूध घी माखन दही पनीर और सभी भारतीय पकवानो और इसके दूध आदि की पौष्टिकता को ध्यान में रख कर तथा ! इसके मूत्र और गोबर से उत्पन्न होने वाली खाद और इसके औषधीय गुणों को ध्यान में रख कर और मृत्यु के बाद भी इसकी उपयोगिता को ध्यान में रखकर इसके मांश को  ना खाने की बात करनी चाहिए !जो लोग गाय का माष खाते है !उनका कहना है कि इसका माष सस्ता होता है !इसीलिए गरीब लोगों को भी बीफ खाने का अवसर प्राप्त हो जाता है !किन्तु एक गाय के मास  से एकदिन में कुछ लोगों को ही फायदा होता है !किन्तु एक जीवित गाय कई सालों तक अपने दूध आदि से कई परिवारों का पोषण करती है !विज्ञानं ने भी यह सिद्ध किया है !कि गाय का दूध सभी दूध देने वाले जानबरों  से अधिक स्वास्थ्य प्रद होता है !यदि एक गाय का पालन एक परिवार करे तो उसको और उसके परिवार को दूध घी आदि पर्याप्त मात्र में प्राप्त हो सकता है !इसके गोबर और मूत्र तथा सूखे पत्तो आदि की जैविक खाद कृषि की उर्बरा शक्ति बढ़ादेती है !तथा अन्न दालें सब्जियां आदि भी अत्यंत स्वास्थ्यप्रद होती हैं !जो आज किसान राशायानिक खादों  का प्रयोग कर रहा है !उस से भूमि की उर्बराशक्ति नष्ट हो रही है !तथा दूध और सब्जियां और खाद्यान भी जहरीला हो रहा है !इसके अलावा भारी मात्रा में स्वदेशी धन विदेशों में रासायनिक खादें खरीदने में चला जाता है !तथा दुधाररु पशुओं के नाश होने से बाजारों में केमिकल से निर्मित दूध चर्बी से निर्मित घी बिक रहा  है !जिस से लोग भारी मात्रा में गंभीर रोगों से ग्रस्त हो रहे हैं !इन सब बातों को ध्यान में रख कर गाय की उपयोगिता को ध्यान में रखकर गाय की रक्छा पर विचार करना चाहिए !भारत में अनादि काल से निर्मित माबा और देशी घी से निर्मित मिठाईयां मिलाबटी घोषित की जा रही हैं !और विदेशी चॉकलेट आदि जो सुअर की चर्बी और गाय के मांश से निर्मित होती हैं !देश में बिकरही हैं !जिनको हिन्दू मुसलिम  बूढे बच्चे सभी खा रहे हैं !

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