Tuesday, 15 September 2015

भारत विश्व का प्राचीनतम देश हैं !यह भूतकाल में विश्व गुरु कहलाता था !उसका कारण भी यही था कि आध्यात्मिक ज्ञान की जीवन पद्धति यहीं से विश्व को प्राप्त हुई थी !भगवान श्री कृष्ण ने गीता १७(२३)में कहा है कि परमात्मा का निर्देश ओम तत सत इन  तीन प्रकार के नामों से होता है !इन्ही  तीन नामों से परमा त्मा का संकेत किया गया है ! उसी परमात्मा ने श्रष्टि निर्माण के समय ही वेदों तथा ब्राह्मणो और यज्ञोँ की रचना की थी !अर्थात परमात्मा के ज्ञान और जीवन जीने की कला का ज्ञान वेदों में स्वयं दिया था !और वेद ज्ञान को समझ कर उस ज्ञान का स्वयं आचरण करने वाले ब्राह्मणो की रचना भी परमात्मा ने कीथी !और जीवन जीने की कला तथा बिभिन्न प्रकार की  आध्यात्मिक साधनाओ के द्वारा श्रष्टि के भौतिक पदार्थों अर्थात  संसार के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले पृथ्वी जल अग्नि वायु और आकाश को बिना छति पहुंचाए आत्मशकि से ही प्राप्त शक्ति से सभी लौकिक पारलौकिक  स्वर्ग नर्क आदि की प्राप्ति और अंत में  मोक्छ प्राप्ति का विधान भी यज्ञोँ के माध्यम से संसार के सामने ब्राह्मणो ने यज्ञीय जीवन पद्धति को अपने आचरण में उतारकर संसार के सामने रखा था !वेदों ने ही लोक व्यबस्था में धर्मकी स्थिति का सही चित्रण प्रस्तुत करते हुए !काल को चार विभागों सतयुग त्रेता द्वापर और कलियुग में विभाजित कर दिया था !तथा युगानुसार धर्म  की स्थिति भी बतायी थी !यह कलियुग चल  रहा है !अभी इसको सिर्फ ५४०० बर्ष के लगभग  हुआ है !इसकी आयु ४३२००० बर्ष  बतायी गयी है !और इस युग के बारे में कहागया है !कि इस युग में सनातन धर्म नष्ट होजायेगा !और वेद द्वारा प्रतिपादित व्यबस्था का पालन कराने वाले लोग आचरण भ्रष्ट हो जाएंगे !और अनेक प्रकार के पंथ मजहब उत्पन हो जाएंगे !जो भारत की वैदिक संस्कृति का नाश करेंगे !कलियुग को घोर अधर्म युग कहा गया है !इसमें जीवन जीने की कला और इन कलियुगी मजहबीं और मतों से वैदिक संस्कृति के साधू संतो सन्यासियोँ द्वारा अपनी तपस्या से सनातन  धर्म को सुरक्छित और संरक्छित करने के लिए विधियां बतायी गयी है !रामायण ,गीता महाभारत  उपनिषद् आदि इसी सनातन धर्म की सुरक्छा के लिए आसान साधना के उपाय प्रस्तुत करते हैं !भारत की लगभग १३०० साल की गुलामी ने  भारत वासियों की वैदिक संस्कृति को नष्ट करके अपने अधूरे धर्मों को प्रवेश करा दिया है !और देश में कुछ लोगों ने लालच और लोभ से तथा कुछ ने भय से इन विदेशी धर्मों को स्वीकार कर लिया है !और कुछ विदेशी विद्वानो ने श्रष्टि के सृजन के अपने अधूरे  और कल्पित दृष्टि कौण इतिहास में प्रविष्ट करा दिए !तथा  इसी प्रकार के झूठे और मनगढंत इतिहास ने अकबर को महान और उसके समय में देश की आर्थिक सामाजिक स्थिति को स्वर्ण युग निरूपित कर दिया है !जबकि अकबर के समकालीन तुलसीदास जी ने उस समय की भारत की दीन दशा का बहुत ही मार्मिक और दर्द भरा चित्र प्रस्तुत किया है !अकबर के विरुद्ध युद्ध करने वाले महान योद्धा और देश की धर्म संस्कृति स्वाभि मान के लिए लाखोँ स्त्री पुरुषों के बलिदानो का कोई जिक्र नहीं है !अकबर अत्यंत अय्याश और वैदिक संस्कृति को नष्ट करने वाला और मुग़ल सल्तनत को भारत में विस्तार देने वाला साशक था ! !जिसने  वैदिक संस्कृति को नष्ट करने के लिए चंद स्वार्थी राजपूत  राजाओं के सहयोग से और कुछ चाटुकार हिन्दू दरबारियोँ के माध्यम से कुशल साशक  के रूप में मुगलिया सल्तनत को स्थापित किया !और सामजिक और धार्मिक रूप से वैदिक धर्म का नाश किया !उसी का उदाहरण ये ज्वाला मुखी देवी की ज्वाला नाश  करने का उसका कुत्सित प्रयत्न था जिसमे वह बिफल हुआ !ऐसे और भी अनेक वैदिक संस्कृति के नाशक अकबर के प्रसंग हो सकते हैं !जिनको उजागर किया जाना चाहिए !

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