भगवान श्री कृष्ण ने गीता १६(२३)में कहा है कि जो मनुष्य शाश्त्र विधि का त्याग करके अपनी इक्छा से मनमाना आचरण करता है ! वह ना तो अंतःकरण की शुद्धि और पवित्रता को प्राप्त करता है ! और ना ही उसे सुख शांति की प्राप्ति होती है ! और न ही परम गति प्राप्त होती है ! अतः धार्मिक विधि विधान की पूर्णता के लिए क्या करना चाहिए ? और क्या नहीं करना चाहिए ? इसके लिए शाश्त्र ही प्रमाण है ! इसीलिए सारे धार्मिक उत्सव और सारे धार्मिक कृत्य शाश्त्र विधि के अनुसार ही करना चाहिए !आज कल लोगों में धर्म कृत्यों में आस्था तो बढ़ रही है !किन्तु बे कृत्य मनमाने ढंग से किये जा रहे हैं !उसका दृश्य गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन मेदिखायी दे रहा है! !गणेश की मूर्ति स्थापना के दिन से ही साधकों को नियम संयम का पालन करना चाहिए !और जोगणेश पूजन का शास्त्रीय विधि विधान है उसका पालन करना चाहिए !किन्तु गणेश मूर्ति की स्थापना के दिन न तो कोई नियम संयम पूर्वक ब्रत उपवास करता है !और ना ही गणेश प्रतिमा का निर्माण शाश्त्र विधि के अनुसार किया जाता है !और ना ही स्थापना विधि विधान के अनुसार की जाती है !और ना ही जिस दिन से मूर्ति की स्थापना होती है !उस दिन से गणेश प्रतिमा के बिसर्जन तक प्रतिमा का शाश्त्र विधि के अनुसार पूजन किया जाता है !कहीं कहीं तो यह भी देखने में अत है कि आयोजन करने वाले युवक शराब आदि पीकर हुल्लड़ मचाते हैं !आम रास्ता रोक कर लोगों का आवागमन भी अवरुद्ध कर देते हैं !यह संपूर्ण कृत्य धर्म के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति तो करते हैं !किन्तु ऐसे आयोजनो के लिए धार्मिक विधि विधान का पालन नहीं करते हैं !जिस तरह से भवन निर्माण का शाश्त्र है !चिकित्सा और एटम बम निर्माण का शाश्त्र है !मनुष्य के जीवन के लिए जितने भी उपयोगी कार्य कलाप हैं !उन सबके अलग अलग शाश्त्र हैं !यदि उन शाश्त्रो का कार्य संपन्न करने के लिए उपयोग ना किया जाय तो बे कार्य संपन्न नही हो सकते हैं !उसी प्रकार धार्मिक कार्यों का जन्म से मरण तक और विवाह आदि के भी शाश्त्र हैं !और उन शास्त्रीय विधियों का श्रद्धा पूर्वक पालन करने से ही उन कार्योँ की सिद्धि होती है !ये सम्पूर्ण शाश्त्र विधियां धर्म ग्रंथों में लिखी हुई है !इनका ज्ञान कर्मकांडी ब्राह्मणो को होता है !इसलिए मूर्ति स्थापना से लेकर बिसर्जन तक के अभी कार्य इन शाश्त्री ब्राह्मणो के निर्देशन में ही सम्पन्न होने चाहिए !अगर इस प्रकार के शाश्त्री ब्राह्मण उपलब्ध ना हों !तो गीता प्रेस गोरखपुर ने सभी देवी देवताओं के पूजन विधान के ग्रन्थ प्रकाशित किये हैं !जो अत्यंत अल्प मूल्य में बाजारों में उपलब्ध हैं !उनको खरीद कर उनमे बर्णित नियमो का पालन कर मूर्ति स्थापना और विसर्जन का कार्य संपन्न किया जा सकता है !इन सभी धार्मिक कृत्योँ के किये प्रमाणित सामग्री सिर्फ गीता प्रेस की पुस्तकों में ही मिलेगी !
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