Tuesday, 29 September 2015

विश्व सहित भारत में लोकतंत्र की स्थापना के लिए मानवता की स्थापना के लिए बड़ा लम्बा संघर्ष मानवता वादियों    ने किया था !इस संघर्ष में अनेकों ने अपने जीवनो को कुर्बान कर दिया था ! और बहुतों ने अपने जीवन की जबानी सुख ऐश्वर्य का संपूर्ण त्याग इस लोकतान्त्रिक व्यबस्था की स्थापना के लिए कर दिया था ! और आज भी कर रहे हैं !परिणाम स्वरुप विश्व के अनेक देशों में लोकतान्त्रिक व्यबस्था की स्थापना हो गयी ! किन्तु लोकतंत्रीय जीवन जीने के लिए मनुष्यों का मानस अभी नहीं बन पाया है !यूरोपियन देशों में लोकतंत्रीय मानस निर्माण करने के लिए !गांधीजी द्वारा आचरित सत्य अहिंसा को आधार बनाकर अब लोग इन देशों में सक्रिय हो गए हैं !भारत ने गांधीजी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है !गांधीजी अभी भारत की जरुरत नहीं बन पाये हैं !भारत में अभी सत्य अहिंसा की भूख जाग्रत नहीं हो पायी है !और गांधी जी को भी स्वतंत्र भारत में ५ माह से अधिक जीवित नहीं रहने दिया गया !परिणाम स्वरुप जिस सत्य अहिंसा की शक्ति का प्रयोग उन्होंने गुलाम भारत को आजाद कराने के लिए किया था ! वह आजाद भारत में लोकतांत्रिक मानस के निर्माण के लिए नहीं कर पाये !भारत में इसीलिए ३० जनबरी १९४८ तक के गांधी जी की चर्चा होती है !जिसमे कुछ लोग गांधी जी को खल नायक के रूप में प्रस्तुत करते हैं !और कुछ उनका स्तुति गान करके अपनी गांधी भक्ति का प्रदर्शन कर के अपना उत्तरदायित्त्व पूर्ण कर देते हैं !किन्तु गांधी आचरण में ना उनको खलनायक बताने वालों में है ! और ना गांधी के भक्तों में !क्योँकि अभी हम सबकी आवश्यकता पैसा और पद प्रितिष्ठा प्राप्त करने की है !इसीलिए इसी एक मात्र लक्छ्य की प्राप्ति के लिए संसद  से लेकर ग्राम सभाओं तक में प्रवेश करने के प्रयत्न में नेता लगे दिखाई देते हैं !और इनमे प्रवेश के लिए धनबल, बाहुबल ,जाति बल और साम्प्रदायिक बल का  प्रयोग किया जा रहा है !ग्राम स्वाराज्य को गांधी जी ने देश के विकास का माध्यम बनाया था !इसी दृष्टि को ध्यान में रख कर राजीव गांधी की सरकार ने ग्राम स्वराज्य की स्थापना का कानून पास करा दिया था !इस क़ानून से गाओं के लोगों की भागी दारी शासन प्रशासन में बड़ी !किन्तु नेताओं का मानस ग्राम स्वराज्य के मूलभूत सिद्धांतों के अनुसार नहीं बदला !इसीलिए ग्राम स्वराज्य के लिए आवंटित धन का उपयोग प्रधान या सरपंच अपने निजी कार्योँ के लिए करने लगे !और गाओं से लेकर जिला स्तर तक नेताओं ने ग्राम स्वराज की स्थापना को भ्रष्टाचार का केंद्र बना दिया है  !जिस प्रकार से सांसद या विधायक निर्वाचित होने के बाद  नेता अकूत संपत्ति के मालिक हो जाते हैं !उसी प्रकार ग्राम प्रधानऔर जनपद पंचायत का अध्यक्छ बन जाने के बाद ये अकूत संपत्ति के मालिक बन जाते हैं !इसलिए इन पदों के लिए चुने जाने के लिए नेता धन बल, बाहु बल जाति बल साम्प्रदायिक बल आदि का खुला प्रदर्शन करते  हैं !अभी तो देश बासियों को सिर्फ इस बात से ही संतोष करना पड़ेगा कि देश में लोकतंत्र है !इसकी बास्तविक स्थापना के लिए नया संघर्श शुरू करना पड़ेगा

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