इस बकरीद का रहस्य हजरत इब्राहीम की खुदापरस्ती में छिपा हुआ है ! वह खुदा की इबादत खुदा की राह में अपने आप को कुर्बान करके करते थे !उनके दिल दिमाग में अल्लाह के अलावा और किसी बस्तु का महत्त्व नहीं था !अल्लाह ने उनकी इबादत की परीक्छाली और उनसे उनके पुत्र की कुर्बानी मांगी !अल्लाह की राह में बे तुरत अपने जिगर के टुकड़े को कुर्बान करने के लिए तैयार हो गए !और उनका लखते जिगर भी ख़ुशी ख़ुशी अपनी कुर्बानी देने को तैयार हो गया !अल्लाह अपने इन दो महान भक्तों की कुर्बानी से अभी भूत हो गया !पिता ने अपने पुत्र प्रेम को अल्लाह को अर्पित कर दिया !और पुत्र ने खुसी खुसी अपने शरीर को अल्लाह के लिए क़ुरबानी के लिए सुपुर्द कर दिया !इसीलिए अल्लाह ने इस उच्चकोटि की कुर्बानी को संकेत रूप में स्वीकार करने केलिए !बकरे को भेज दिया !और बकरा कुर्बान कर दिया गया !तब से यह बकरा कुर्बान करने की परम्परा चालू हो गयी !और हरसाल बकरीद करोङो बकरों के लिए मौत का पैगाम लेकर आती है !मुसलमानो के लिए यह क़ुरबानी होती है !और बकरों के लिए यह मौत की निशानी होती है !इस बकरीद का रहस्य बकरे की कुर्बानी में नहीं है !बल्कि अपनी सबसे प्रिय बस्तु की कुर्बानी में है !क्योँकि जिन बकरों की कुर्बानी दी जाती है !बे बिशेष तौर पर बकरीद के दिन ही अल्लाह की कृपा से जन्म नहीं लेते हैं !अगर मुसलमान बकरीद के दिन अपनी प्रिय बस्तु की कुर्बानी हजरत इब्राहीम की तरह दें !तो अल्लाह की रहमत उनपर बरसेगी !बकरा मुसलमानो की सबसे प्रिय बस्तु नहीं होती है !वह तो कुछ रुपयों में खरीद कर कुर्बान कर दिया जाता है !इसीलिए अब बकरीद के दिन कुछ मुस्लमान बकरे की कुर्बानी देने के बजाय मजलूमों और गरीबों को बकरी दान में देने लगे हैं !इसीलिए वह गरीब व्यक्ति बकरी का दूध भी खाता है !और बकरी के जो बच्चे होते हैं !उनसे उसको बेचने से आय भी होती है !किसी गरीब को कुर्बानी के बकरे का गोश्त देने से उसका एक दिन का पेट पलता है !किन्तु उसको जीवित बकरी देने से सालों साल उसको दूध भी मिलता रहता है !और बकरी के बच्चों को बेचने से उसको कई साल तक रुपया भी प्राप्त होते रहते हैं !
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