इन शहीदों के बारे में बहुत सी मनगढंत बातें भी ख्याति के भूखे लोग कर देते हैं !आज एक समाचार पत्र में ऐसे ही एक क्रन्तिकारियों के जीवन की जानकारी रखने वाले दम्भी ने लिखा है कि भगत सिंह ने फांसी पर झूलने के पहले सफाई कर्मचारी के हाथ की रोटी खाने की इक्छा प्रगट की थी !और उसके हाथ की रोटी खाकर ही भगत सिंध प्रसन्नता पूर्वक फांसी के फंदे पर झूल गए थे !किन्तु यहां जो जानकारी उनके परिवार द्वारा दी गयी है !कि उन्होंने अंतिम समय रसगुल्ला खाया था !और लेनिन की जीवनी पड़ी थी !यह बात अधिक प्रमाणिक प्रतीत होती है !इसी प्रकार एक झूठ व्यापक स्तर पर फैलाया जा रहा है !की गांधी जी ने भगत सिंह को फांसी से नहीं बचाया था !जबकि बो चाहते तो भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव को फांसी से बचा सकते थे !ये लोग राजनैतिक लाभ उठाने की दृष्टि से बड़े से बड़ा झूठ बोलने में भी शर्म महसूस नहीं करते हैं !गांधी जी ने इन युवा क्रांतिकारियों को फांसी ना हो इसके लिए अपनी पूरी ताकत लगा दे थी !गांधी जी ने उस समय के वायसराय इरविन से व्यक्तिगत तौर पर मिलकर और पत्र लिख कर भी कहा था ! कि जनमत इन क्रांतिकारियों को मौत की सजा देना के विरुद्ध है !और सरकार को जनमत का आदर कर इन युवा देश भक्तों की फांसी माफ़ कर देनी चाहिए !किन्तु ब्रिटिश हुकूमत ने गांधी जी की बात मानने से इंकार कर दिया था !गांधी जी का भगत सिंह को बचाने का यह सम्पूर्ण प्रयास विस्तार से सम्पूर्ण गांधी बांग्मय में बिस्तार से वर्णित है !इसके अलावा यह भगत सिंह आदि की जान बचाने के प्रयत्नो की चर्चा करनेवाले लोग यह भूल जाते हैं !कि भगत सिंह की राष्ट्र भक्तिऔर बलिदान की भावना इन तथाकथित नेताओं की तरह सिर्फ शाब्दिक ही नहीं थी ! वह बास्तविक थी !उनके पिताजी ने पुत्र मोह से आसक्त होकर एक पात्र ब्रिटिश हुकूमत को लिख दिया था !जब इसका पता भगत सिंह को लगा था !तो उन्होंने अपने पिता को कड़ा प्रतिरोध प्रेषित किया था !हम सबको इन युवा क्रांतिकारियों के सम्बन्ध मेसिर्फ प्रमाणिक जानकारी ही प्रकाशित करनी चाहिए !
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