लालू के इस व्यान ने राजाओं के राज समाप्त होनेके पूर्व उस कथन को जीवित कर दिया है !जब राजा लोग कहते थे ! कि हमारे बाप दादों ने भुजबल से राज्य प्राप्त किया था !उसको ये गांधी कपडे का लत्ता (झंडा ) दिखाकर कैसे समाप्त कर सकता है ?लेकिन राजतंत्र उसी झंडे ने समाप्त कर दिया जिसे राजा लोग लत्ते का टुकड़ा कहते थे !आरक्छण की वकालत लालू ऐसे लोग नहीं करेंगे ?तो और कौन करेगा ?इसी अन्याय युक्त आरक्छण ने लालू के कथन के अनुसार ही होटल में चाय सर्व करनेवाले और भेंस चराने वाले लालू के पास इतनी अकूत संपत्ति इकट्ठी कर दी है !और इतनी अधिक राजनैतिक सत्ता प्रदान करा दी है !कि जिस अरक्छित समुदाय से लालू आते हैं !उस अरक्छित समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति के लाभ के लिए १० लाख साल भी आरक्छण रहे तब भी उनको लाभ प्राप्त नहीं हो पायेगा !किन्तु दलित हों या पिछड़े इनमे भी चंद आरकच्छित जातियां और उनमे भी चंद लोग ही राजनैतिक दृष्टि से सत्ता में सपरिवार बने रहेंगे ! और आरक्छण से लाभ प्राप्त करने वाले चंद लोग ही मलाई और मालमत्ता उड़ाते रहेंगे !किन्तु इस प्रकार के लोग भूतकाल में भी थे !और आज भी है !किन्तु ये सिर्फ राक्छ्सों की तरह पृथवी का भोग करना ही जानते हैं !और इनका विनाश स्वयं श्रष्टि का निर्माता ही करता है !इन राक्छ्सों दैत्यों और दानवों की भौतिक शक्तिइतनी अधिक बढ़ जाती है !कि आम आदमी इनका मुकाबला नहीं कर सकता है !इसीलिए लालू यादव का यह कथन सही कि अगर माँ का दूध पिया हो !तो आरक्छण ख़त्म कर के दिखाओ ?बैसे भी माँ का दूध बालपन में ही पोषण प्रदान करता है !बाद में तो गाय का दूध सद्बुद्धि प्रदान करता है !और भेंस का दूध बुद्धि को भौंथरी कर देता है !और लालू को भेंस का दूध प्रिय है ! !लालू जी आप सुखी और समृद्ध रहें और सपरिवार सत्ता सुख भोगते रहें
No comments:
Post a Comment