समाज में भी समुद्र की तरह तरंगे उठती और गिरती रहती हैं !कभी संसार के प्रति बैराग्य और आत्मा के प्रति अनुराग की लहर उठती है !और बुद्ध ,महाबीर आदि इस लहर को प्रतिबिंबित करते हैं !यह लहर समाज के स्वरूप में तीब्र करुणा प्रेम मानवता अहिंसा आदि के बीज बो देती है !और कुछ समय के लिए सामाजिक जीवन में त्याग तपस्या और मानवता के असंख्य फलदार ब्रक्छ दिखाई देने लगते हैं !और सम्राट अशोक जैसे क्रूर शासक भी हिंसा का मार्ग त्याग कर अहिंसक हो जाते हैं !समाज में व्यक्तिगत सुख वैभव के स्थान पर समाज को सुखी समृद्ध बनाने के लिए संकल्पित सज्जनो के समूह क्रियाशील हो जाते हैं !धीरे धीरे यह लहर नीचे गिरना शुरू हो जाती है !और अंत में इस लहर का नाम और रूप ही रह जाता है !किन्तु इसमें से त्याग और तपस्या के मूल तत्त्व नष्ट हो जाते हैं !इस समय समाज में निम्नस्तरीय स्वार्थ पूर्ति की लहर पूरे बेग से ऊंचाई पर पहुंची हुई है !इस लहर का स्वाभाविक स्वरुप और गतिविधि समाज के हितों को बलिदान कर व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति करने का होता है !और इस स्वार्थपूर्ति के लिए धन संपत्ति का संचय आवश्यक अंग होता है !इसीलिए धन कमाने के लिए लोग सभी अनैतिक साधनो को अंगीकार कर लेते हैं !रेलवे में भी जब ठेके दिए जाते हैं !तो ठेका लेनेवालों से रिश्वत आदि ली जाती है !इस कार्य में दलाल और अधिकारी कर्मचारी सभी शामिल होते हैं !यात्रियोँ को भोजन देने का भी ठेका होता है !यात्रिओं को शुद्ध ,साफ़ और उत्तम भोजन प्रदान किया जाय !इसके लिए खाद्य पदार्थों की गुणबत्ता का विशेष तौर पर वर्णन सिद्धांत रूप में किया जाता है !किन्तु यह सब कार्य ऊपरी तौर पर मात्र दिखाबे के लिए किया जाता है !किन्तु भोजन का ठेका देने केसमय जो ईमानदार भोजन निर्माता है !उनको ठेका ना देकर शिफारिश और सुविधा शुल्क लेकर ठेका दे दिया जाता है !उसका परिणाम यह होता है !कि न तो भोजन सामग्री में उत्तम खाद्द्यान का प्रयोग किया जाता है !और ना भोजन को साफ़ सफाई से बनाया जाता है !इसीलिए कभी भोजन में कीड़े निकलता हैं !और कभी भोजन वासी ही गरम करके परोश दिया जाता है यहां जिस बात का खुलासा किया गया है !कि यात्रियोँ का जूठा बचा हुआ खाना गंदे बर्तनो में इकट्ठा किया जाता है !और फिर उसी जूठे खाने को ताजा बने हुए खाने के साथ बढ़िया कागजों में लपेटकर और प्लेटों में सजाकर यात्रियों को परोश दिया जाता है !यह बात शिकायत के बाद विजिलेंस टीम ने पकड़ी है !इस से ऐसे दीखता है कि विजिलेंस टीम सिर्फ शिकायत प्राप्त होने पर ही विजिलेंट होती है !बाकी समय सिर्फ तनख्वाह लेती रहती है !और आराम करती रहती है !यह सब समाज में इस समय स्वार्थ निष्ठा की उठीहुई तरंग का ही परिणाम है !और इसका दर्शन और प्रभाव भारतीय समाज के सभी अंगो और छेत्रों में दिखाई दे रहा है !किन्तु अब इस तरंग की गति पर भी थोड़ा बहुत शिकंजा कसता दिखाई दे रहा है !इसके रोकथाम का प्रयत्न भी होता रहेगा !किन्तु समाज की यह तरंग भी धीरे धीरे काल के प्रभाव से नीचे गिरना शुरू हो जायेगी !जैसे समुद्र की सभी ऊँची नीची तरंगे समुद्र में ही उठती है !और अंत में समुद्र में ही गिरती हैं !उसीप्रकार समाज समुद्र की तरंगे भी समाज में ही उठती और समाज में ही बिलीन हो जाती हैं !किन्तु समुद्र की तरह समाज का नाश नहीं होता है !रेलवे में जूठा भोजन यात्रियों को परोसने का यह समाचार जरूर यात्रिओं को जागरूक करेगा !और रेलवे प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी समझेगा !और भोजन में इस तरह की गड़बड़ी भविष्य में ना हो इसके लिए विजिलैंट टीम को हमेशा विजिलैंट रखेगा !
No comments:
Post a Comment