Wednesday, 2 September 2015

राजनीति में अशुद्धि व्यापक स्तर पर प्रवेश कर चुकी है !उसी का परिणाम यह व्यापम घोटाला है !नेता लोग शुद्ध आचरण देश भक्ति नैतिकता आदि की बातें तो बहुत करते हैं !किन्तु आचरण उसके विपरीत करते  हैं !उसका विषाक्त परिणाम देश की सभी व्यबस्थाओं  पर पढता है !भगवान श्री कृष्णा ने गीता ३ (२१)में कहा है कि श्रेष्ठ मनुष्य जो जो आचरण करता है दूसरे मनुष्य वैसा वैसा ही आचरण करते हैं ! वह अपने कर्मों से जो प्रमाण प्रस्तुत करता है  !दूसरे मनुष्य भी कर्मछेत्र में उसी का अनुकरण करते हैं ! समाज में जिस मनुष्य को श्रेष्ठ माना जाता है ! उस पर विशेष जिम्मेदारी रहती है कि वह ऐसा कोई आचरण ना करे तथा ऐसी बात ना कहे जो लोक मर्यादा को नष्ट कर भ्रष्ट आचरण को प्रोत्साहित  करे !राजनीति में कथनी करनी का फर्क राजनीति में प्रवेश के साथ ही शुरू हो जाता है !चुनाव में राजनेताओं के सभी आदर्श हबा में उड़ जाते हैं !और यह कथनी करनी का अंतर प्रवेश से लेकर सत्ता में बने रहने या सत्ता की पुनर प्राप्ति के लिए जारी रहता है !इस राजनैतिक प्रदुषण से सारा देश प्रदूषित हो गया है !और फिलहाल इस से मुक्ति की सम्भावना दिखाई नहीं दे रही है !

No comments:

Post a Comment