मध्य प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की बात करती है !जब इस प्रकार की घोसणा कोई सरकार करती है ,तो भ्रष्टाचार से पीड़ित आम जनता को यह आशा बंधती है !कि अब भ्रष्टाचार पर नियंत्रण होगा !किन्तु भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी कर्मचारी इस प्रकार की घोसनाओ से जरा भी भयभीत नहीं होते हैं !और ना ही भ्रष्ट आचरण में कोई सुधार लाते हैं भगवान कृष्ण गीता में ३(२१)में कहा है कि सामान्य जन श्रेष्ठ पुरुषों के आचरण कोही प्रमाण मान कर तदनुसार आचरण करते हैं लोकतंत्र में मंत्रियों का आचरण यदि शुद्ध नहीं होगा !तो राज्य के अन्य अधिकारीयों का आचरण भी शुद्ध पवित्र नहीं रह सकता है !यहां कैलाश विजयबर्गीय के भ्रष्टाचार के आरोप के सम्बन्ध में जो उच्च न्यायालय की इंदौर खंड पीठ ने टिप्पड़ी की है ! कि सरकार बिजयवर्गीय के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण पंजीकृत करने के लिए अनुमति नहीं दे रही है !इस से सरकार की भ्रष्टाचार को मिटाने की प्रतिबद्धता संदेह के घेरे में आजाती है !सरकार को शीघ्र विजयबर्गीय आदि के बिरुद्ध अपराधिक प्रकरण पंजीकृत करने की अनुमति प्रदान कर देनी चाहिए !ताकि मध्य प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की घोसणा अप्रमाणिक सिद्ध न हो
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