आरक्छण ख़त्म किया जाय ?या ना किया जाय ?यह विचार का विषय हो सकता है ?आरक्छण जाति के आधार पर हो या आर्थिक आधार पर हो ?यह भी विचारणीय है !किन्तु आरक्छन जिन दलित जातियों को दिया गया !और पिछड़ी जातियोँ को दिया गया !क्या उन सभी जातियों को अब तक आरक्छन का लाभ मिला है ?जिन जातियोँ को आरक्छन का लाभ मिला है !उनमे आरक्छन का लाभ कुछ प्रतिशत परिवारों को ही मिला है !जो राजनीति से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की जगहों पर आरक्छन का लाभ उठाकर माल काट रहे हैं ?इसीलिए इस तथ्य को उजागर करने के लिए सभी सरकारों को स्वेतपत्र जारी करना चाहिए !क्योंकि आरकच्छित जातियों में भी सबसे ज्यादा लाभ आरक्छन का कुछ कुछ ही जातियों को मिला है ! शेष !दलित जातियां अभी भी दलितों को प्राप्त आरक्छन से वंचित है !इसी प्रकार पिछड़ी जातियोंके आरक्छन का लाभ भी सिर्फ चंद पिछड़ी जातियों और परिवारों को ही प्राप्त हुआ है !शेष पिछड़ी जातियां अभी भी अरकछन से वंचित है !इसलिए अरकछन का न्याय युक्त विभाजन तो पहले आरकच्छित जातियों में ही किया जाय !इसके बाद जातिगत आरक्छन के स्थान पर आरक्छन क स्वरुप बदल कर आर्थिक आधार पर किया जाय !
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