Monday, 21 September 2015

तहसीलदार तहसील स्तर पर प्रशासनिक अधिकारी होने  के साथ उसको मजिस्ट्रेट के अधिकार भी होते हैं इसीलिए तहसील दार से यह आशा कदापि नहीं की जाती है !की वह अन्याय भी करेगा ! और झूठ भी बोलेगा !यहां तहसीलदार की यह बात प्रथम दृष्टि में ही झूठी दिखाई देती है !कि जो महिला सांसद के द्वारा हड़पी गयी जमीन के विरोध में धरना दे रही थी !उसकी तबीयत बिगड़ने के कारण उसे बे हॉस्पिटल ले जा रहे थे !इसीलिए उसने अपने कपडे खुद फाड़ लिए थे !और वह मारपीट और कपडे फाड़ने का झूठा आरोप लगा रही है !हमीरपुर के सांसद चंदेल कभी प्रभाव शाली व्यक्ति हैं !उन्होंने मिहला की जमीन हड़पी या नहीं हड़पी ? इसकी जांच करायी जानी चाहिए थी !ताकि आरोप का सही समाधान होता !किन्तु उसके विपरीत उसकी मारपीट की गयी !उसके बस्त्र फाड़ दिए गए !उसको निर्बस्त्र कर दिया गया !और पुलिस सांसद के प्रभाव के कारण मूक दर्शक बनी रही !ये आरोप बिना जाँच के गलत सिद्ध नहीं किये जा सकते हैं !जबकि तहसीलदार का झूठ साफ़ साफ़ दिखाई देता है !अगर अनसन या धरने पर बैठे हुए किसी अनसनकारी या धरना देने वाले की हालत बिगड़ती है !तो उसके स्वास्थ्य की जांच अनसन स्थल पर जाकर डॉक्टर करता है !फिर उसकी जांच के बाद पुलिस उसको डॉक्टर की देख रेख में हॉस्पिटल ले जाती है !यह काम तहसीलदार नहीं करता है !इसीलिए इस प्रकरण की जांच उत्तरप्रदेश सरकार को जिलाधिकारी से कराना चाहिए !और अगर जाँच में मिहला के आरोप सिद्ध हो जाते है !तो तहसीलदार के विरुद्ध कानूनी कार्यबाही की जानी चाहिए !और इस गरीब महिला की  जमीन को भी अवैधानिक कब्जे से मुक्त कराया जाना चाहिए !

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