Monday, 21 September 2015

इन सभी महापुरुषों की आकस्मिक मृत्यु संदेह के घेरों में है !और इन सबकी मृत्यु के रहस्य का खुलासा आज तक नहीं हो पाया है !किन्तु श्यामाप्रसाद मुकर्जी लालबहादुर शाश्त्री और सुभासचन्द्र बोस की मृत्यु के जो तथ्य प्रस्तुत किये गए है !बे बहुत अधिक संदेहास्पद है !श्यामाप्रसाद मुकर्जी की मृत्यु कश्मीर में हुई थी !बे अत्यंत निर्भीक निडर और उच्चकोटि के राष्ट्रभक्त थे !और जम्मुकश्मीर के भारत में विलय के प्रबल समर्थक थे !इसीलिए बे कश्मीर के उस छेत्र में बिना अनुज्ञापत्र के प्रवेश कर गए थे  !जो जम्मू कश्मीर के भारत में बिलय कप्रेबल विरोधी था !इसीलिए परिस्थितियां इस और संकेत करती है !कि उनकी मृत्यु स्वाभाविक नहीं थी ? शाश्त्री जी के परिवार वालों का यह कथन है !की शाश्त्री जी ने मृत्यु के कुछ समय पूर्व ही प्रसन्न चित्त और स्वस्थ अवस्था में  टेलेफोन से बात की थी !उनके परिवार के लोग भी शाश्त्री जी की मृत्यु को स्वाभाविक मृत्यु नहीं मानते थे !किन्तु इन सबसे अधिक विवाद नेताजी सुभास की मृत्यु का है !कोई भी फाइल उनकी मृत्यु के रहस्य को उजागर नहीं कर सकती है !क्योँकि उनकी मृत्यु १९४५ में हबाई दुर्घटना में हुई !इसके चश्मदीद गबाह उनके साथ उस हबाई जहाज दुर्घटना में घायल होने के बाद भी जीवित बचे कर्नल हवीबुर्रहमान का व्यान है !जिन्होंने नेताजी की दुर्घटना में मृत्यु के पूर्व नेताजी के कथन का  शब्दसः बर्णन किया है !तथा उन्होंने नेताजी की मृत्यु का समय भी बताया था !यह विवरण उन्होंने गांधी जी को रोते हुए बताया था !अगर सुभास बोस की मृत्यु दुर्घटना में नहीं हुई थी !तो वह कब हुई ?कैसे हुई ?इसका रहस्य सिर्फ नेताजी सुभास ही बता सकते थे !किन्तु अब तो निश्चित तौर पर यह कहा ही जा सकता है !कि अब बो जीवितनही है !अगर नेताजी सुभास बोस देश कीस्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी जीवित थे ?तो उनको छिपे रहने की क्या आवश्यकता थी ?नेताजी की लोकप्रियता देश और विदेश में इतनी अधिक थी !कि स्वतंत्र भारत में कोई भी शक्ति चाहे भारतीय राजनीति की रही हो या इंग्लैंड की रही हो ?या बे युद्ध अपराधी रहे हों ?उनको दण्डित करने की शक्ति किसी में नहीं थी !फिर भी जीवित होने के बाद भी प्रगट ना होना और अज्ञात रूप में रहना !इसका रहस्य नेताजी के सिबा और कौन बता सकता है ? इसीलिए इन सभी की मृत्यु के रहस्य देवकी नंदन  खत्री के लिखे चन्द्रकान्ता संतति उपन्यास के रहस्यों की तरह रहस्य ही बने रहनेवाले है !

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