Friday, 8 January 2016

९(७)मनुष्य लोक से लेकर ब्रह्मलोक तक के संपूर्ण प्राणी आयुपूर्ण होने पर मृत्यु को प्राप्त होते है किन्तु सभी प्राणियो की आयु में अंतर होता है ब्रह्मा का एक दिन मनुष्योँ की आयु की गड़ना के अनुसार ४करोद ३२ लाख साल का होता है इतनी ही उनकी रात्रि होती है इस प्रकार जब ब्रह्मा की १०० साल की आयु पूरी हो जाती है तो सारी सृष्टि भगवान की प्रकृति में समा जाती हैं जिसे महा प्रलय कहा जाता है प्रकृति में लीन हुए इन प्राणियों के कर्म जब पक जाते है और फलदेने के लिए उन्मुख हो जाते हैं तब ईश्वर सभी प्राणिओं के परिपक्व कर्मों का फल देकर पूर्वकृत कर्मों के अनुसार उनके शरीरों की रचना करते है सभी प्राणिओं के शरीरों की रचना उनके पूर्व जन्मों में किये गए कर्मों के अनुसार ही होती है ईश्वर अपनी इक्छा से किसी भी शरीर का निर्माण नहीं करता है सृष्टि निर्माण की इस क्रिया महा सर्ग कहते हैं

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