Friday, 29 January 2016

गांधीजी का अंतिम दिन-सदा की भांति गांधी जी साढ़े तीन बजे सुबह जगे १३ से १८ जनबरी के उपवास के बाद बे अभी भी कमजोरी महसूस कर रहे थे पौने पांच बजे उन्होंने गरम पानी शहद और नीबू का रस लिया और एक घंटे बाद १६ औंश नारंगी का रस लिया उनकी तबियत सुबह की शैर के निकलने के लिए अच्छी नहीं थी इसलिए थोड़ी देर कमरे के भीतर ही इधर उधर टहलते रहे खांसी को शांत करने के लिए वह पिसी हुई लोंग का चूर्ण तथा ताड गुड की गोलिआं लिया करते थे लोंग का चूर्ण ख़त्म हो गया था इसलिए मनु गांधी उनके साथ टहलने में शरीक होने के बजाय थोड़ा सा लौंग का चूर्ण तैयार करने के लिए बैठ गयी उसने गांधी जी से कहा अभी आकर साथ हो जाती हूँ नहीं तो रात को जरुरत पड़ने पर जरा सा भी चूर्ण नहीं रहेगा उन्होंने मनु से कहा कौन जानता है की रात पड़ने से पहले क्या होगा ?अथवा में जीवित भी रहूँगा या नहीं ?यह भी कहा अगर रात को में जीवित रह गया तो तुम आसानी से चूर्ण तैयार कर सकती हो इसके बाद उन्होंने अपने सचिव को अपना आखिरी बसीयत नामा दिया और कहा की इसे सावधानी से पढ़ लो अगर कोई बात रह गयी हो तो उसे जोड़ देना फिर उन्होंने स्नान किया 9.३० बजे सुबह का खाना खाया उसमे उबला हुआ साग बकरी का दूध ४ पके टमाटर ४ संतरे गाजर का रस अदरख और खट्टा नीबू तथा घृत कुम्हारी का काढ़ा था फिर उन्होंने नोआखाली के समाचार सुने १०.३० पर बे आराम करने खाट पर लेट गए इसके बाद मुलाकातों का सिलसिला फिर शुरू हो गया सुधीर घोष और एक अंग्रेज ने टाइम्स की एक कतरन पढ़ कर सुनाई जिसमे सरदार पटेल और नेहरू के मतभेदों से लाभ उठाकर सरदार को सम्प्रदाय बॉडी बताकर उनकी निंदा की गयी थी और नेहरू की प्रांसा का ढोंग रचा गया था गांधी जी ने कहा मै ऐसे लोगो को जानता हूँ १.३० बजे उन्होंने पेट पर मिटटी की पट्टी रखबाई पट्टी उत्तर जाने के बाद मुलाकातें फिर शुरू हुई सीलोन के डॉ डिसिल्वा उनकी पुत्री फ्रांस का पत्रकार लाइफ पत्रिका की मार्गरेट आदि ने मुलाकात की ४बजे मुलाकातें ख़त्म हुई इसके बाद गांधीजी सरदार पटेल के साथ अपने कमरे में चले गए सरदार के साथ उनकी पुत्री भी थी चर्खा कात ते हुए एक घंटे से अधिक बात चीत की गांधी जी ने सरदार से कहा पहले मेने यह विचार व्यक्त किया था की तुमको या नेहरू को मंत्रिमंडल से बाहर आने के लिए कहूँ लेकिन अब मै निश्चित तौर पर इस नतीजे पर पहुंचा हूँ की तुम दोनों का मंत्रिमंडल में रहना आवश्यक है आप दोनों की जरा सी भी फूट इस इस्थिति में विनाशकारी साबित होगी नेहरू जी प्रार्थना के बाद मुझ से मिलेंगे तब उनसे भी इस बात की चर्चा करूँगा प्रार्थना का समय निकट आ गया था और बात अभी भी चल रही थी इसलिए सरदार की पुत्री ने घडी की ओर इशारा किया गांधीजी ने कहा अब मुझे तेजी से प्रार्थना के लिए भागना होगा रास्ते में उनको सेविका ने बताया की काठियाबाद के दो कार्यकर्त्ता मिलने का समय चाहते है गांधीजी ने कहा प्रार्थना के बाद आएं अगर जीबित रहा तो उस समय उनसे मिलूंगा जब गांधीजी चबूतरे की सीढ़ीओं पर चढ़ गए जहाँ प्रार्थना होती थी उसी समय कोई आदमी दाहिनी और से भीड़ को चीरते हुए आगे आगया और प्रणाम की मुद्रा में हाथ जोड़कर गांधीजी के सामने झुकते हुए पिस्तौल से एक के बाद एक तीन गोलियां चलायीं गांधीजी जमीं पर लुढक गए उनके मुख से निकले हुए अंतिम शब्द थे राम राम
कतिपय बिन्दुओ पर आपकी शह दंगा कराने की ओर प्रेरित करती हँ ऐसा लगता है! विश्व में व्याप्ति बढ़ाने की तीव्र इच्छा रखने वाले कतिपय मुसलमीन face book पर अभद्र/असभ्य भाषा का प्रयोग कर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं हम उनके सहयोगी ना बने। कमसेकम अभद्र/असभ्य भाषा के लिए आपकी ओर से सांस्कृतिक डांट आपकी श्रेष्ठता तथा बिंदु उठाने का वास्तविक उद्देश्य अवगत कराये ऐसी अपेक्षा हम सभी की स्वाभाविक इच्छा है! कुछ अधिक हो गया हो तो क्षमा प्रार्थी हूँ!
BBC Hindi
SPECIAL STORY ON GODSE: क्या आप जानना चाहेंगे नाथूराम गोडसे का परिवार उनके बारे में क्या सोचता था. पढ़िए खास रिपोर्ट रेहान फज़ल की जो गोडसे के परिवार से मिलकर लौटे हैं.
http://bbc.in/1wCpoZE

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