Thursday, 7 January 2016

धार्मिक सामाजिक कार्योँ में आर्थिक सहयोग देना अपनी सीमित आय में घर गृहस्थी का खर्च चलाना और इस युवक की तरह अनाथ बच्चों का पालन करना सम्बेदना के और सहयोग के उत्तम उदाहरण है किन्तु एक दूसरा पक्ष भी है जहाँ ना सम्बेदना दिखाई देती है ना मानवीयता और ना कर्तव्य निष्ठां सरकार की और से अनाथों के पालन पोषण के लिए फण्ड दिए जाते हैं जिनको खाने पचाने में अधिकारिओं कर्मचारिओं को कोई शर्म नहीं आती है इसीप्रकार बाढ़ हो या कोई अन्य प्राकृतिक विपदा हो इन सबका फण्ड अधिकांश ये निर्लज्ज अधिकारी खा जाते हैं धर्म के नाम पर भी जो रुपया श्रद्धालु देते है उसका उपयोग ये तथाकथित धार्मिक लोग बिलास्ता में खर्च करते हैं इसलिए नागरिकों का यह परम कर्त्तव्य है की वह अपनी सीमित आय का उपयोग इन कार्योँ में सावधानी पूर्वक करें और इस राष्ट्रीय कर्तव्य का भी निर्वहन करें इन भृष्ट संवेदना रहित अधिकारिओं को कानून के द्वारा दण्डित कराएं और धर्म के नाम पर विकसित होने वाले भोग विलास के लिए आर्थिक सहयोग अपना पेट काट कर ना दे

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