Sunday, 10 January 2016

 भारत की अस्मिता और पहचान ही आध्यात्मिक है !इसीकारण से यहाँ स्वदेशी और विदेशी सभी धर्म जन्मे और विकसित हुए !जब इस्लाम और ईसाई धर्मों ने इस देश में पदार्पण किया तो इस देश ने उनका खुले मन से स्वागत किया ! भारत के बहुत से राजाओं और धनपतियों ने भी चर्च  और मस्जिद  के निर्माण में सहयोग किया !इसका मूल कारण भी यही है कि भारत में जन्मे ऋषियों ,साधुओं ,और महात्माओं ने संपूर्ण भारत में पैदल घूम घूम कर इस बात  का सन्देश जन जन तक पहुंचाया कि सभी के शरीर आकार, प्रकार, रंग, रूप, बुद्धि, वैभव समृद्धि आदि में जरूर भिन्न भिन्न हैं  किन्तु उन सभी शरीरों में एक ही आत्मा का निवास है !इसीलिए सभी के  सुख दुःख समान  हैं !सभी का यह कर्तव्य है कि सभी शरीरों को आत्मदृष्टि से देखें  और सभी को सुख सुविधा प्रदान कराएं  और किसी भी जीव की हत्या ना करें यहाँ तक कि अनावश्यक रूप से ब्रक्छों , भूमि , पहाड़ों का भी छेदन भेदन ना करें !इसीलिए भारत कभी भी अनादिकाल से साम्प्रदायिक नहीं रहा !भारत के सन्देश को यहाँ के सभी धर्मों को ग्रहण कर विश्व को यह सन्देश देना चाहिए कि भारत ने  कटटरता और सम्प्रद्यिकता का  कभी पोषण नहीं किया

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