Friday, 22 January 2016

बच्चों को महापुरुषों के जन्म मरण आदि का  शिक्छण और जीवन कार्यों का शिक्छण   कराया  जाना चाहिए !ताकि बे भविष्य में महापुरुषों के महान त्याग और तपस्या युक्त जीवन को अपना आधार बनाकर राष्ट्र को सम्मुन्नत बनाने में समर्थ हो सकें !  और राष्ट्र भक्ति के द्वारा विश्व मानव बनने में सफल हो सकें !और युवाओं और प्रौढ़ तथा बृद्ध पुरुषों को बे  जहाँ भी जिस कर्मछेत्र में बे प्रवृत्त हों अपने जीवन कार्यों से महापुरुषों के द्वारा किये गए लोक कल्याण और राष्ट्र भक्ति के कार्यों को बच्चों के अनुसरण करने के लिए अपने आचरणों से  प्रस्तुत करना चाहिए !भारत में उल्टा हो रहा है !बच्चों को महापुरुषों के बारे में शिक्छण नहीं दिया जाता है !आलसी,प्रमादी  और कर्तव्य भ्रष्ट  लोग महापुरुषों के जन्म दिन पर छुट्टी की मांग करते हैं !और कर्तव्य भ्रष्ट  सरकारें तुरत छुट्टी की घोसणा कर देती हैं !ये कर्तव्य भ्रष्ट  शासन में बैठे लोग और आलसी प्रमादी अधिकारी ,कर्मचारी और शिक्छक बच्चों को महापुरुषों के   जीवन कार्यों के शिक्चण से वंचित कर देते हैं ! और अधिकांशतः अपने नाम को रोशन और मीडिया में अपने नाम को प्रकाशित करने के लिए मान  सम्मान की प्राप्ति की लिए प्रयासरत  लालची लोग जो अपने जीवन कार्यों से देश और समाज को बिगाड़ने और कलंकित   करने वाले l फिर महापुरुषों के बारे में विचार गोष्ठियों का आयोजन  आदि करते हैं !ये शव्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले तथाकथित लोग घोर अवसरवादी और स्वार्थी होते हैं !बच्चों से युवा हुए भारतीय नवयुवक महापुरुषों के जिए गए जीवन का किंचित मात्र लक्छण भी इनके द्वारा आचरित जीवन में नहीं दीखते  हैं !बल्कि ये महापुरुषों के आचरण के विपरीत कर्म करते दिखाई देते हैं !अन्यथा जिस देश भारत की विरासत त्याग तपस्या और देश भक्ति की रही हो ! उस स्वतंत्र भारत में कर्त्तव्य निष्ठा काअभाव और चारों और व्याप्त भ्रष्टाचार कैसे टिका रह सकता था  ?!विशाल सेना और आतंरिक सुरक्छा तंत्र के रहते कुछ आत्तंक वादीस देश पर आत्तंकवादी हमले करने में कैसे सफल हो सकते थी ?भुखमरी गरीवी आदि कैसे टिकी रह सकती थी ?इसिलए महापुरुषों के स्मरण करने की पद्धति बदलनी चाहिए !बच्चों को महापुरुषों के महान कार्यों का शिक्छण विद्यालयों में दिया जाना चाहिए !और उनका प्रशिक्छण अध्यापकों और अभिभावकों के आचरण से होना चाहिए !

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