Saturday, 23 January 2016

देश में महापुरुषों के जन्मदिवस पर छुट्टी करने की मांग करने का रिवाज बन गया है और सरकार भी इस मांग को तुरत स्वीकार कर लेती है ना मांग करने वाले इस पर विचार करते हैं और ना ही सरकार की महापुरुषों के जन्म दिन या पुण्य तिथि पर छुट्टी की मांग करना या छुट्टी देना महापुरुषों का सम्मान नहीं बल्कि जिन लोगों की काम करने में रूचि नहीं होती है ऐसे निठल्ले काम चोरों को काम ना करने का एक और अवसर प्रदान करना है महापुरुषोँ का जीवन आराम हराम है की तर्ज पर चलता है और उनके नाम पर उनको सम्मान देने के लिए लोगों को काम ना करने की स्वतंत्रता दी जाती है यह अत्यंत शर्म नाक विरोधा भास है जब की उनकी कर्म संस्कृति का ज्ञान कराने के लिए उस दिन सामान्य दिनों से अधिक काम करना चाहिए और विद्यालयोँ में विद्यार्थिओं को उनके महान जीवन के बारे में बताया जाना चाहिए विद्यालयोँ की छुट्टी होती है किन्तु विद्यार्थिओं को यह जानकारी नहीं होती है की जिस कारण से छुट्टी हुई है वह व्यक्ति कौन था और उसने देश और समाज के लिए कब और कौन से महान कार्य किये थे वैसे भी सरकारी स्कूलोँ में सामान्य दिनों में भी पढ़ाई नहीं होती है इसलिए महापुरुषोँ के जन्म या पुण्य तिथि पर छुट्टी ना देकर अतिरिक्त कर्म प्रेरणा दिवस के रूप में बनाया जाना चाहिए और विद्यालयोँ में विचार गोष्ठिओं का आयोजन कर उनके जीवन के बारे में जानकारी देनी चाहिए तथा काम चोरी और निठल्ला पन को अवकाश दिवस के रूप में देने की प्रथा बंद की जानी चाहि

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