Monday, 4 January 2016

गीता ज्ञान १(७,८)अस्माकं तू विशिस्टा ये (७)भवान्भीष्मश् कर्णश्च (८)-------दुर्योधन द्रोणाचार्य से कहता है ! हे द्विजोत्तम हमारे पक्छ में जो महान योद्धा है  !उनके बारे में भी आप जान लीजिये  !आप स्वयं, भीष्म ,करण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त का पुत्र भूरिश्र्वा  ! द्रोणाचार्य बृद्ध होने पर भी नवयुवकों से अधिक तेजस्वी थे ! युद्ध के समय उनकी आयु ८५ साल की थी ! समरभूमि में डटे हुए द्रोणाचार्य प्रज्वलित अग्नि के सामान मालुम होते थे! उन्हें अर्जुन बहुत प्रिय थे बे एक मात्र रथ का भी  आश्रय ले रणभूमि में एकीभूत  हुए सम्पूर्ण देवताओं, गन्धर्वों और मनुष्यों को अपने दिव्यास्त्रों द्वारा नष्ट कर सकते थे  ! भीष्म पितामह कौरवों की सेना के प्रधान सेनापति थे ! उन्हें सेना सम्बन्धी प्रत्येक कर्म का ज्ञान था  ! बे युद्ध करने और विपक्छी के द्वारा चलाये हुए अश्त्रों का प्रतिकार करने की कला के मर्मज्ञ थे ! उन्हें देवता, ,गन्धर्व और मनुष्यों तीनो की ही व्यूह रचना का ज्ञान था ! उन्होंने अपने दस दिन के युद्ध में पांडव सेना का भारी संघार किया था ! बे अजेय और अवध्य थे ! उन्होंने स्वयं पांडवों की अपनी मृत्यु का उपाय बताया था ! करण अद्धितीय वीर था ! वह यद्द्पि कुंती का पुत्र और पांडवों का बड़ा भाई था किन्तु उसका पालन पोषण अधिरथ सूत ने किया था ! उसने अश्त्र शास्त्र की शिक्छा द्रोणाचार्य और भगवान परसुराम से पायी थी ! दुर्योधन उसी की शक्ति के कारण अपने को अजेय समझता था ! उसको युद्ध से बिरत करने के लिए भीष्म, कृष्ण और कुंती ने भर्षक प्रयत्न किया था  किन्तु उसने किसी की भी बात को नहीं माना ! युद्ध में उसकी मृत्यु अर्जुन के द्वारा हुई थी ! कृपाचार्य द्रोणाचार्य के साले थे बे नाना प्रकार के अश्त्र शस्त्र एवं धनुष धारण करने वाली बहुत सी सेनाओं को अग्नि के सामान दग्ध करते  हुए समर भूमि में विचरण करते थे ! महाभारत युद्ध  के बाद भी बे जीवित बच गए थे ! अश्वत्थामा सभी धनुर्धरों से बढ़कर था ! वह द्रोणाचार्य का पुत्र था ! वह युद्ध में विचित्र ढंग से शत्रुओं का सामना करता था ! वह अश्त्र, शाश्त्र से संपन्न और महारथी था ! उसमे क्रोध तेज और आश्रमबासी तपस्वियों की योग्य तपस्या का अद्भुत समन्वय था ! दोनों सेनाओ में उसके सामान शक्ति शाली और कोई नहीं था ! उसमें अशंख्य गुण  थे
1 वह दण्डधारी काल के समान समर भूमि में विचरण करता था ! उसको अमर कहा गया है ! ऐसा कहा जाता है कि वहआज भी जीवित है ! विकर्ण दुर्योधन का भाई था और अस्त्रविद्या का ज्ञाता तथा छेदन भेदन में कुशल था  ! वह गदा प्रास तथा ढाल तलवार के प्रयोग में भी कुशल था ! वह अत्यंत सदाचारी धार्मिक व्यक्ति था ! द्रौपदी के चीर  हरण के समय उसने द्रौपदी जुए में हारी नहीं गयी है ! इसका समर्थन किया था ! वह महाभारत युद्ध में भीम के हाथों मारा गया था ! सोमदत्त के पुत्र भूरिश्रवा भी अस्त्र विद्या के पंडित और कौरवों के परम सुहृद थे ! उन्होंने पांडव सेना का भारी संघार किया था ! अर्जुन द्वारा उनकी बांह काट दी गयी थी  !युद्ध भूमि में जब बे आमरण अनशन पर बैठे हुए थे तब सात्यकि ने उनका बध कर दिया था  !

No comments:

Post a Comment