Tuesday, 12 January 2016

१(१७,१८,१९)काश्यश्च परमेश्ववासः शिखंडी च महारथः ---------बड़ा  धनुष धारण करने वाले काशिराज और महारथी शिखंडी ,द्रष्टद्युम्न विराट ,तथा अपराजित सात्यकि ,द्रुपद और द्रौपदी के पाँचों पुत्रों ने अभिमन्यु  तथा अन्य सभी राजाओं ने अपने अपने शंख बजाये ! उन शंखों की ध्वनि पृथ्वी से लेकर आकाश तक गूंज उठी जिस से धृतराष्ट्र के पुत्रों के ह्रदय विदीर्ण हो गए ! काशिराज जिस समय युद्ध भूमि में उतरकर युद्ध करते थे ! उस समय बे आठ रथियों के बराबर हो जाते थे ! शिखंडी का जन्म स्त्री के रूप में हुआ था !द्रुपद के कोई पुत्र नहीं था ! इसीलिए उनकी पत्नी ने भगवान शंका की आराधना की थी !भगवान शंकर के वरदान से उनको पुत्री की प्राप्ति हुई थी !जब द्रुपद की महारानी ने भगवान शंकर से यह निबेदन किया कि उसने आराधना पुत्र की प्राप्ति के लिए की थी !तब भगवान शंकर ने कहा था कि कालांतर में यह लड़की दैव के प्रभाव से पुरुष बन जायेगी !इसीलिए द्रुपद ने शिखण्डिनी के सभी संस्कार पुत्र की तरह किये !और यह बात छिपा राखी कि शिखण्डिनी लड़की है !शिखण्डिनी ने द्रोणाचार्य से अश्त्र शस्त्र और धनुर्वेद की शिक्छा प्राप्त की और वह युद्धकला में पारंगत  होका महारथी हो गयी !जब शिखण्डिनी युवाबस्था को प्राप्त हुई !तब उसका विवाह द्रुपद ने दशार्ण देश के राजा हिरण्यवर्मा  की पुत्री से कर दिया !जब हिरण्यवर्मा की पुत्री को विवाह के बाद यह मालूम पड़ा कि शिखण्डिनी स्त्री है !तब उसने अपने पिता के पास द्रुपद के इस धोखे के बारे   में बताया !हिरण्यवर्मा ने द्रुपद के राज्य पर आक्रमण करने का एलान कर दिया !जब शिखण्डिनी को इस बात का पता लगा !तो उसने निर्जन बन में जाकर अन्न जल त्यागकर मृत्यु को वरण करने का निर्णय किया !जिस वन में शिखण्डिनी अन्न जल त्याग कर मृत्यु को वरण करने का प्रयत्न कर रही थी !उसी बन में स्थूणाकरण नाम का यक्छ निवास करता था !स्थूणाकरण ने शिखंडनी से मृत्यु वरण करने का कारण पूंछा ! तब शिखण्डिनी ने सम्पूर्ण बर्तान्त  यक्छ को सुनाया !यह सुन कर यक्छ के ह्रदय में करुणा भाव जाग्रत हो गया !और उसने यक्छी विद्या से अपना पुरुषत्व शिखण्डिनी को दे दिया और उसका स्त्रीत्व स्वयं धारण कर लिया !और शिखण्डिनी से कहा की जब तुम्हारा काम पूर्ण हो जाए तब तुम हमारा पुरुषत्व वापिस कर देना !जब हिरण्य वर्मा ने शिखण्डिनी की परीक्छा ली तो वह पुरुष सिद्ध हो गया !इस पर हिरण्यवर्मा अपनी पुत्री को डाट डपट कर वापिस विदर्भ देश में लौट गया !इसी बीच यक्छों के अधिपति कुबेर स्थूणाकरण के भवन पर आये जब स्थूणा करण उनके स्वागत के लिए उपस्थित नहीं हुआ !तब उसने उसके उपस्थित ना होने का कारण पूँछा तो स्थूणाकरण के सेवकों  ने बताया कि इस समय स्थूणाकरण स्त्री बन गया है !इस पर कुबेर ने श्राप दे दिया कि अब स्थूणाकरण स्त्री ही बना रहेगा !इस प्रकार शिखण्डिनी शिखंडी बन गयी !राजा  द्रुपद और विराट यद्द्पि आयु में बृद्ध थे ! किन्तु बे बड़े पराक्रमी और युद्ध में अजेय तथा महारथी  थे धृष्टद्युम्न भी महारथी और पांडवों की संपूर्ण सेना का सेनापति था ! द्रौपदी के पांचों पुत्र भी महारथी थे ! मधुवंशी सूरवीर सात्यकि भी महारथी था ! वह mahaabharat युद्ध में kisi भी वीर के dwaara parajit नहीं हुआ था लम्बी भुजाओं वाला अभिमन्यु यूथपतियों का भी यूथपति था वह शत्रुनाशक वीर समरभूमि में अर्जुन और श्री कृष्ण के सामान पराक्रमी था !   

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