१(२८,२९,३०)------दृष्ट्वा इमाम स्वजनं कृष्ण युयुत्सम समुपस्थिम ---------हे कृष्ण युद्ध की इक्छा वाले इस कुटुंब समुदाय को अपने सामने उपस्थित देख कर मेरे अंग शिथिल हो रहे हैं ! तथा मुख सूख रहा है ! मेरे शरीर में भी कैंप काँपी हो रही है ! रोंगटे खड़े हो रहे हैं ! तथा हाथ से गांडीव धनुष गिरता मालुम पड़ रहा है ! और त्वचा भी जल रही है !मेरा चित्त भ्रमित सा होता मालुम पड़ता है ! और में खड़ा रहने में भी मुश्किल महसूस कर रहा हूँ ! सभी स्वजन युद्ध के लिए उत्सुक हैं ! यह देख कर गात्र शिथिल हो गए हैं ! कान से सुनने की अपेक्छा साक्छात आँखों से देखने पर विशेष असर होता है ! विनोबा जी ने अर्जुन में स्वजनो को देख कर गात्र गलित हो गए, मुख सूख गया ,कम्प ,रोमांच ,गांडीव गिरगया, त्वचा जलने लगी ,खड़ा नहीं रह सकता मन चकराने लगा इन भावों को अष्ट तामस भाव कहा है !
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