महाभारत से सम्बंधित एक आख्यान है !युद्ध के बाद जब युधिस्ठर राजा हो गए !तो उन्होंने अपने मंत्री से कहा कि किसी महात्मा का पता करो जिसके चरण धोकर में उसको भोजन कराना चाहता हूँ !महाभारत युद्ध के बाद कुरुछेत्र गिद्धों और माशाहारी जानबरों और बहुत प्रेतों ,भूतों और पिशाचों काकेंद्र बन गया था !साधु संत वहां खोजने पर भी नहीं मिलते थे !एक दिन जासूसों ने बताया की कुरुक्छेत्र के भीसण रक्त पात से रंजित एक गुफा में महात्मा रहते हैं !और बे सिर्फ अमावस्या को ही गुफा से कुछ समय के लिए बाहर निकलते हैं !मंत्री अमावस्या के दिन गुफा के बाहर बैठ कर महात्मा के निकलने की प्रतीक्छा कर रहा था !दोपहर को महात्मा गुफा से बहार आये !मंत्री ने उनके चरणो में शाष्टांग दंड बात किया !और अपना परिचय देकर निवेदन किया कि धर्म राज युधिस्ठर अपने राजमहल को आपके पावन चरणो से पवित्र करने के लिए आपको भोजन के लिए आमंत्रित किया है !यह सुनकर महात्मा विलाप करने लगा और तुरत गुफा के अंदर चलागया !जब मंत्री ने यह बात युधिस्ठर को बतायी तो युधिस्ठर बड़ा दुखी होकर सोचने लगा कि क्या उसका राजमहल और अन्न इतना दूषित और अपवित्र है !कि कोई महात्मा आना तो दूर रहा निमंत्रण की बात सुनकर ही रोने लगता है !यह बात बहुत दुखी होकर युधिस्ठर ने भगवान श्री कृष्ण को सुनाई !यह सुनकर पहले तो भगवान श्री कृष्ण मुस्कराये फिर बे भी उदास होगये !जब युधिस्ठर नेइसका रहस्य जानना चाहा तो भगवान श्रीकृष्ण ने कहा की में मुस्कराया इसीलिये था की इस महात्मा नेइस रक्तरंजित स्थान को भगवान की साधना के लिए इसीलिए चुना था कि यहाँ उसकी साधना में बिघ्न करने कोई नहीं आएगा ! किन्तु यहां भी तुम्हारा मंत्री उसको निमंत्रित करने पहुँच गया ! इसीलिए में मुस्कराया था कि अभीभी ऐसे साधु संत हैं !जो आराधना के लिए एकांतवास करते हैं औरउनके जीवन का ध्येय सिर्फ ईश्वर कीप्राप्ति ही होती है !किन्तु आने वाले समय में जो कलियुग होगा उसमे ऐसे संत साधु नहीं मिलेंगे इसीलिए में उदास हो गया था !साधु भोग को त्याग कर योग की और बढ़ता है !किन्तु यह कलियुग है इसमें साधु महात्मा योग के नाम से भोग की प्राप्तिकरते है !राम रहीम आदि इसी कोटि के साधु संत है जो योग नाम मात्र का करते है ! और भोग का सेवन प्रचुर मात्र में करते हैं !तुलसी दास जी ने रामचरित मानस के उत्तर काण्ड में कलियुगी तपस्वियों की चर्चा करते हुए कहा है !तपसी धनवंत दरिद्र ग्रही !कलिमहिमा तात ना जात कही !
No comments:
Post a Comment