Wednesday, 1 June 2016

Narottam Swami
2 जून 2015 ·
हिन्दू धर्मग्रंथों में वर्णित बहुत से तथ्यों की बौद्धिक विवेचना का प्रचलन तथा कथित धार्मिक सुधारकों ने प्रारम्भ किया है अत्यंत पराचीन सनातन संस्कृति की बाहक सनातन धर्म परम्परा को दो प्रकार के आघात विगत २००० साल में सहने पड़े हैं !एक प्रकार का हमला अर्वाचीन काल में उदय धर्मो के मानने वालों ने किया जिन्होंने अपने धर्म के विस्तार के लिए सनातन धर्म पर कठोर प्रहार किये !दूसरे प्रकार का हमला उन लोगों ने किया जो नास्तिक थे ! किन्तु सबसे खतरनाक हमला हिन्दू धर्म को मानने वालों ने किया ! जिन्होंने अज्ञान वष अपने बौद्धिक छमता के प्रदर्शन के लिए सनातन धर्म के ग्रंथो में वर्णित चरित्रों को घटनाओ को अपनी बुद्धि के अनुसार प्रतीकात्मक मान कर उनकी व्याख्याएं प्रस्तुत की ! और कुछ ने तो महाभारत और श्री मदभग्वद गीता के ही बहुत से अंशों को काल्पनिक मान कर उनको ग्रंथों से निकाल कर नयी महाभारत और गीता ही रच दी !इसी क्रम में रावण के दश शीशों की व्याख्या दस विकारों के रूप में बताने का प्रयत्न किया गया है !गीता प्रेस गोरखपुर ने सनातन धर्म के सभी धर्मग्रंथो को यथार्थ रूप में प्रस्तुत किया है ! धर्म की परिपक्व अवश्था अध्यात्म के रूप में प्रगट होती है !इसीलिए धर्म के मामले में सभी तथ्यों को ना तो धार्मिक बुद्धि और न ही नास्तिक बुद्धि से जाना समझा जा सकता है !बहुत से अनुभव इस प्रकार के आध्यात्मिक होते हैं ! कि उनका सिर्फ अनुभव ही किया जा सकता है !उन्हें वाणी से व्यक्त नहीं किया जा सकता हैं !व्यास देव ने भी महाभारत में कहा है की अनिवर्चनीय आध्यात्मिक बस्तु की व्याख्या शवदातीत होती है ! इसीलिए वहां बुद्धि का प्रवेश नहीं होता है !सनातन धर्म ग्रंथो में वर्णित बहुत सी घटनाओ को भौतिक विज्ञान सिद्ध कर रहा है !महा भारत में महर्षि अगस्त के विवाह की घटना में बताया गया है !की उनके पितरों ने बंश परम्परा को कायम करने के लिए विवाह करने का आग्रह किया था !अगस्त ने कहा की मुझे तो विवाह करने की कोई आवश्यकता नहीं है !किन्तु पितरों के हित के लिए उन्होंने वंश परम्परा की रक्षा के लिए विवाह करने की स्वीकृत प्रदान की !किन्तु उनको कोई भी आध्यात्मिक रूप से विकसित कन्या दृष्टि गोचर नहीं हुई !तब उन्होंने योग बल से आध्यात्मिक रूप से विकसित कन्या का भ्रूण तैयार किया ! और उसको विदिशा के राजा को प्रदान करा दिया जो उस समय अपनी रानी के साथ संतान प्राप्ति के लिए तपस्या कर रहे थे !बाद में उसी कन्या के साथ जब वह विवाह योग्य हो गयी ! तब पितरों को प्रसन्न करने के लिए उस से विवाह किया !और उस से एक पुत्र उत्पन्न करने के बाद तपस्या करने के लिए चले गए !अगस्त द्वारा योग बल से निर्मित उस कन्या भ्रूण से जो कन्या विदर्भ नरेश के यहाँ उत्पन्न हुई उसका नाम लोपा मुद्रा है !धार्मिक सुधारवादियों ने इस घटना को काल्पनिक बता कर इसको महाभारत से ही नकाल दिया है !किन्तु अभी हाल में ही अमेरिका में केलिफोर्निया की प्रोफेसर जेनिफर डाडना ने जीनोम एडिटिंग ----केस .९ तकनीक के जरिये बच्चे के गुण अवगुण नैन नक्श वाले भ्रूण का निर्माण किया है !इस प्रकार की अनेक वैदिक धर्म ग्रंथों में वर्णित घटनाओ को विज्ञानं सिद्ध कर रहा है !किन्तु अभी जहाँ विज्ञान नहीं पहुंचा है !ऐसी घटनाएँ जिनको विज्ञान बाद में सिद्ध करेगा ! उनको किसी भी तथाकथित धार्मिक सुधारवादी को सनातन धर्म ग्रंथों से ना तो निकालने की आजादी दी जा सकती है !और ना ही बौद्धिक व्याख्या करने की !आजकल भी समाचारों में २सिर या ३ सर या अद्भुत आकृति के बच्चों के जन्म लेने के समाचार प्रकाशित होते रहते हैं !फिर रावण के दस सर मान ने में क्योँ अविश्वास होना चाहिए !सनतान धर्म ग्रंथों में जो तथ्य जिस रूप में हैं ! आने वाली पीढ़ी के लिए उसी रूप में रहने देना चाहिए

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