Friday, 3 June 2016

गांधी जी पर मिथ्या आरोप और उनकी निंदा --------- संघ के स्वयंसेवक और भाजपा के राष्ट्रिय महामंत्री ने गांधीजी पर अनेक आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में कोई हिस्सा नहीं लिया था !और लोगों को देदी हमें आजादी बिना खडग बिना ढाल !सावरमती के संत तूने कर दिया कमाल नहीं गाना चाहिए आदि ! गांधी जी पूर्ण रूप से अहंकार और राग द्वेष आदि दुर्गुणों से मुक्त हो गए थे !बे सत्य ,अहिंसा के ब्रतधारी थे सत्याग्रह आश्रम अहमदाबाद  की दीवाल पर गांधी जी के यह शव्द आज भी खुदे हुए हैं कि -----मेरे पास कुछ भी संसार को  नया बताने या शिक्छन् देने  के लिए नहीं है !सत्य और अहिंसा  जिनका अनुसरण मेने जीवन भर किया है और जिनको आचरण में उतारने के लिए में सतत प्रयत्न शील रहा हूँ बे भारत में सनातन काल से विद्यमान हैं !इसीलिए गांधीजी पर लगाए गए आरोपों का जबाब  नम्रता और बिना कटुता के ही दिया जा सकता है !गांधी जी ने अपने अनुयायिओं से कहा था कि बे उन पर लगाए जाने वाले  आरोपों से उनका बचाव ना करें !अहिंसक प्रिक्रिया में हिंसा और क्रोध का कोई स्थान नहीं है !इसीलिए गांधी जी ने अपने विरोधियों का  सदैव प्रेम से उनका ह्रदय परिवर्तन किया था !इस तरह के हजारों उदाहरण गांधी जी के जीवन में देखे जा सकते हैं !जहाँ गांधी जी के प्रेम से लोगों के ह्रदय परिवर्तित हुए !लोकमान्य तिलक गांधीजी के अहिंसा के सिद्धांत को स्वीकार नहीं करते थे !जब बे मंडाले कारागार से मुक्त होकर आये तब उन्होंने गांधीजी से बेलगांव में   मुलाक़ात की थी !गांधीजी से लम्बी बातचीत के बाद उन्होंने अपने समर्थकों से कहा था कि गांधीजी हमारे काम के नहीं हैं किन्तु उनका चरित्र और देश भक्ति इतनी उज्जवल है कि उनका विरोध हमलोगों को किसी भी स्तर पर नहीं करना चाहिए !लोकमान्य तिलक की मृत्यु पर गांधीजी पूरी रात नहीं सोये थे !उन्होंने कहा था आज हमारे बीच से स्वराज्य का अखण्ड जाप करने  वाला चला गया है !अब हमारे कन्धों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी आगयी है !उन्होंने तिलक की स्मिृति   के लिए तिलक स्वराज्य फंड में देश भर में भ्रमण कर एक करोड़ का चन्दा भी इकठ्ठा कर दिया था !महर्षि अरविंदो भी अहिंसा को राजनीति में पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं करते थे !उनकी और गांधी जी की कभी मुलाकात नहीं हुई!उन्होंने अपने एक शिष्य के हाथों गांधीजी के पास अपनी एक पुस्तक लाइफ डिवाइन  भेजी थी !जिस पर उन्होंने लिखा था की ईश्वर ने आपको देश सेवा के लिए चुन लिया है !अरविंदो के प्रणाम !जब गांधी जी दक्छिन अफ्रीका में रंगभेद के विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे तब वहां का प्रशाशक फील्ड मार्शल स्मिथ गांधीजी का प्रवल विरोधी था 1किन्तु गांधीजी ने प्रेम से उसका भी ह्रदय परिवर्तित कर दिया था !जब गांधीजी ने १९४२ में अंग्रेजो भारत छोडो का नारा दिया था !तब विश्व के अधिकाँश राष्ट्र उनके विरोध में थे !उस समय स्मिथ और बर्नार्ड शॉ गांधीजी के समर्थन में पूरी तरह खड़े रहे !इंग्लैंड का तत्कालीन प्रधान मंत्री चर्चिल गांधी जी को ब्रिटिश राज्य का प्रवल विरोधी मानता था !और उनको समाप्त कर देना चाहता था !वह गांधीजी को खूसट बूढ़ा और  नंगा फ़कीर कहता था !गांधीजी ने उसको १७ जुलाई १९४४ को पत्र लिखकर कहा था कि खबर है कि आप इस सीधे सादे नंगे फ़कीर को कुचल डालने की इक्छा रखते हैं ! में बहुत अरसे से फ़कीर और बो भी नंगा जो और भी कठिन काम है ,बनने की कोशिश कर रहा हूँ ! इसीलिए में आपके इस कथन को अपनी प्रशंसा ही समझता हूँ ! तो में आपसे उसी हैसियत से अनुरोध करता हूँ कि मुझ पर विश्वास कीजिये और मेरा उपयोग मेरी और अपनी कौम की सेवा के लिए तथा उसके द्वारा संसार की सेवा के लिए कीजिये ! आप गांधी को समाप्त कर सकते हैं किन्तु गांधी द्वारा आचरित सत्य ,अहिंसा को नष्ट नहीं कर सकते हैं -----आपका सच्चा मित्र एम के गांधी!  कुछ दृष्टांत ऐसे भी हैं कि गांधीजी जहाँ अहिंसा और सत्य के प्रयोग से उनका ह्रदय परिवर्तन नहीं कर पाये !यह भी शायद संभव हो जाता अगर ये लोग गांधीजी की हत्या नहीं करते !ये वही लोग है जिनके ह्रदय आज भी हिंसा से भरे हुए हैं !वैदिक संस्कृति और हिन्दू धर्म का गुणगान करने वाले ये हिन्दू धर्म की कोई सीख स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं !अन्यथा यह कम से कम जो व्यक्ति निंदा का उत्तर देना के लिए मौजूद नहीं है !मृत्यु के बाद उस पर आरोप नहीं लगाते शायद गांधी जी पर आरोप लगाने से इन्हे राजनैतिक लाभ प्राप्त करने की आशा हो !और इसीलिए ये गांधीजी पर मिथ्या आरोपण करते रहते हैं !प्रधान मंत्री  जी अमेरिका के राष्ट्र पति और चीन के राष्ट्रपति को गांधीजी का गीता भाष्य भेंट करते हैं ! गांधीजी के सत्याग्रह आश्रम का दर्शन कराते हैं !और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और बहुत से भाजपा के समर्थक गांधीजी को गद्दार कहते हैं !!                

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