गांधी कथा -----------गांधी जी ने नेटाल के सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने के लिए प्रार्थ्रना पत्र दिया था ,!नेटाल की लॉ सोसाइटी ने इस आधार पर गांधीजी के प्रार्थना पत्र का विरोध किया था कि नेटाल के कानून के अनुसार काले या गेहुएं रंग के लोगों वकालत की सनद किसी भी हालत में नहीं दी जा सकती है !नेटाल लॉ सोसाइटी का विरोध सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर गांधी जी का प्रार्थना पत्र स्वीकार कर उनको नेटाल के सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने की आज्ञा प्रदान कर दी थी !गांधी जी ने साउथ अफ्रीका के प्रवास के दौरान या इसके पूर्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक भी अधिवेसन में भाग नहीं लिया था!कांग्रेस के सम्बन्ध में पड़ा जरूर था !हिंदुस्तान के दादा और उस समय के सर्वाधिक प्रसिद्ध और ब्रिटेन की पार्लियामेंट में भारत के सांसद दादा भाई नौरोजी के दर्शन अवश्य किये थे !साउथ अफ्रीका में रंग भेद का विरोध करने और हिन्दुस्तानियों पर होने वाले अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए जिस संस्था का गठन मई या जून १८९४ में किया गया था उसका नाम नेटाल इंडियन कांग्रेस रख गया था !यह संस्था जहाँ गोरों के नसल भेद और अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष कराती थी वहीं दूसरी और हिन्दुस्तानियों के दोष और खामियां तथा उनमें सुधार का भी काम करती थी 1 दक्छिन अफ्रीका के अखबार हिन्दुस्तानियों के विरुद्ध जो उनके आचरण के संबंध में झूठे और अतिशय युक्त समाचार प्रकाशित करते थे उनका खंडन और सही समाचा अखबारों तक पहुंचाने का काम भी यही संस्था करती थी ! !१८९६ में हिन्दुस्तानियों की इजाजत लेकर गांधीजी ६ महीनों के लिए भारत आये थे 1 परन्तु बे ६ महीने भी नहीं रह पाये कि नेटाल से तार आगया और गांधीजी को तुरत नेटाल लौट जाना पड़ा था !
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